श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “संचार क्रांति…“।)
अभी अभी # ८५३ ⇒ आलेख – संचार क्रांति
श्री प्रदीप शर्मा
हमारे देश में क्रांतियाँ वैसे भी कम ही होती हैं ! आज़ादी के बाद ले-देकर एक संपूर्ण क्रांति हुई, और उसके बाद संचार क्रांति ! हमारे देश में जब भी क्रांति होती है, न जाने क्यों सत्ता परिवर्तन भी हो जाता है।
आज हमारे जिन हाथों में एंड्राइड फोन है, वह कभी एक पेजर के लिए भी तरस जाता था। पेजर को पैंट के बेल्ट के साथ एक रिवाल्वर की तरह लटकाया जाता था, पेजर की घंटी बजती थी, और आपको सन्देश मिलता था। पेजर-मैन दौड़कर किसी एस टीडी से कॉल लगा लेता था।।
फिल्मों में एक हास्य-अभिनेता सतीश कौशिक थे, डेविड धवन के कारण उनका एक किरदार पप्पू पेजर बहुत लोकप्रिय हुआ।
आज पप्पू लोकप्रिय है, और पेजर आउट ऑफ डेट। वैसे इतिहास गवाह है कि पप्पू भी हमारे लिए नया नहीं। हर पाँच परिवार में एक पप्पू पैदा होता है, जो माँ का भी लाड़ला होता है। पप्पू आज भी लाड़ला है, पेजर गायब हो गया।
काजल की कोठरी और कोयले की दलाली में काले हाथ, दो विपरीत परिस्थितियां हैं, कोलगेट कांड और 2-G स्पेक्ट्रम ने फिर क्रांति की, और कांग्रेस विक्स फॉर्मूला-44 बनकर रह गई। हरिवंश राय के वंशज एक आईडिया लेकर आए, वॉक एंड टॉक ! What an idea Sir ji ? आज अभिषेक कहाँ वॉक कर रहे हैं, और कहाँ टॉक, ऐश्वर्या ही जाने।।
कभी कुछ मीठा हो जाए, और नवरत्न तेल से मालिश के वाद, अगर कुछ दिन गुजरात में गुज़ार लिए जाएँ, तो क्या बुरा है। बाद में तो रोजी-रोटी के लिए वापस केबीसी में आना ही पड़ता है।
मन की बात के पश्चात देश में सेल्फ़ी-क्रांति आ गई। अब आप देश के प्रमुख सेवक के साथ भी सेल्फी ले सकते हैं। मधुर पलों की सेल्फी तक तो ठीक है, लेकिन खतरों के खिलाड़ी बनकर सेल्फ़ी लेना खतरे से खाली नहीं।।
आज इंसान की कमाई भी ऑन लाइन हो गई है, और खर्चे भी ऑन लाइन ! वह सुबह जागते ही ऑन लाइन हो जाता है। जिओ का फ्री डेटा उसके पास है। जब तक फ़ोन चार्ज होता है, वह भी चार्ज हो जाता है। फिर तो पूरा दिन ऑन लाइन ही निकलना है। दफ़्तर में भी ऑन लाइन, घर में भी ऑन लाइन ! और तो और गाँव में, भीड़ में, मेले में, अकेले में भी ऑन लाइन।
आज बच्चों को स्कूल में
i-lessons दिए जाते हैं। बच्चों को मोबाइल से दूर करना माँ-बाप से दूर करना जैसा है। ब्ल्यू-व्हेल से पीछा छूटा तो और कई खतरनाक मछलियाँ मौजूद है, एंड्राइड के तालाब में। राम नाम की माला जिन बुजुर्गों के हाथ में होनी थी, उनके हाथों में एंड्राइड फ़ोन देख यही कहा जा सकता है, हम 21 वीं सदी में पहुँच गए हैं। अगर गलती से कभी आपके घर नारायण पधार जाएँ, तो वीडियो-शॉट लेना न भूलें।।
© श्री प्रदीप शर्मा
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