श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “नहीं का होना …“।)
अभी अभी # ८९७ ⇒ आलेख – नहीं का होना
श्री प्रदीप शर्मा
उस देश में पहले कभी, “नहीं “, हुआ ही नहीं ! वहाँ, ” हाँ ” का ही राज़ था। सब एक दूसरे की, हाँ में हाँ, मिलाते थे। अचानक, यह नहीं, कहाँ से आ गया।
वह एक यस मैन’स् लैंड था !
वहाँ के लोग, नहीं, जानते ही नहीं थे। कभी कोई समस्या ही खड़ी नहीं हुई। हर बात में लोगों की, हाँ होने से कभी कोई देशहित में निर्णय लेने में बाधा उत्पन्न नहीं हुई। ।
अचानक इस, नहीं, ने समस्या खड़ी कर दी ! दिमाग़ी घोड़े दौड़ाए गए, आयोग बिठाए गए, आखिर यह, नहीं, आया तो आया कहाँ से।
इतने दिनों से देश में, हाँ में हाँ, मिलाने के वर्कशॉप्स चल रहे थे, जगह-जगह होर्डिंग्स लगे हुए थे। हाँ में हाँ, के फायदे, मेले, सेमिनार और फेस्टिवल्स आयोजित हो रहे थे, और उसके सकारात्मक प्रभाव भी देश में नज़र आने लगे थे। लेकिन एक, नहीं, ने वातावरण में सनसनी फैला दी। इतने सकारात्मक वातावरण में यह एक नहीं, पूरे तालाब को गंदा कर सकता था। इस नहीं, से क्रांति की बू आती थी। ।
बहुत तलाश की गई ! जमीन आसमान एक कर दिया गया। आखिर इस, नहीं, का मकसद क्या था। तलाशी में सब हाँ में हाँ, मिलाते रहे ! कुछ मिला नहीं, यह भी नहीं कह सकतें थे, क्योंकि नहीं पर प्रतिबंध जो था। हर हाल में इस, नहीं, का पता लगाना था, क्योंकि सरकार को नहीं, सुनने की आदत नहीं थी।
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती ! आखिर मेहनत रंग लाई। रात-दिन की मेहनत, भागा दौड़ी, सरकारी महकमों, सूचना-तंत्र की चुस्ती-फुर्ती और जनता के सहयोग से पता चल ही गया, कि इस, नए नए, खतरनाक और आपत्तिजनक, नहीं, का राज़ क्या था। ।
सुदूर, किसी गाँव में, किसी माँ ने अपने दूध पीते बच्चे से पूछ लिया था, बेटा, भूख लगी ? बेटा बहुत छोटा था ! उसे न तो शब्द-ज्ञान था, और न ही वह अभी ठीक से बोलना सीखा था। बच्चा अपनी मस्ती में था। अचानक उसके मुँह से नहीं, जैसी ध्वनि वाला शब्द निकल गया।
इतना ही नहीं, उसने ज़ोर से सर भी हिला दिया। बस, गली गली शोर मच गया।
बच्चे को सरकार ने प्ले स्कूल में भेज दिया है, जहाँ उसे हमेशा हाँ बोलने की ट्रेनिंग दी जाएगी। एक बच्चे की नादानी से अगर देश में एक बार, नहीं, का प्रवेश हो गया, तो अच्छे भले हाँ, के लिए ही नहीं, देश के लिए भी मुसीबत खड़ी हो जाएगी। यह देश अब और नहीं, नहीं झेल सकता। नहीं, नकारात्मकता है, असहिष्णुता है, विरोध है, क्रांति है। नहीं ? कभी नहीं !
हमारी हाँ में हाँ मिलाइये। ।
हाँ में हाँ मिलाए जा
खुशी के गीत गाए जा। ।
© श्री प्रदीप शर्मा
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