श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “ताऊ उपनिषद् …“।)
अभी अभी # ९२८ ⇒ आलेख – ताऊ उपनिषद्
श्री प्रदीप शर्मा
लाओत्से एक चीनी दार्शनिक हुए हैं! लाओ-सू एक सम्मान जताने वाली उपाधि है। लाओ का अर्थ आदरणीय वृद्ध और सू का अर्थ गुरु है। उनका ताओ उपनिषद् एक दार्शनिक ग्रंथ है, जिस पर ओशो पर्याप्त प्रकाश डाल चुके हैं।
हम यहां हरियाणा के वृद्ध और सम्मानजनक व्यक्तित्व ताऊ पर अपने विचार केन्द्रित करेंगे। इसका महत उद्देश्य भी यही है कि भविष्य में एक उपनिषद् ताऊ पर भी रचा जाए। ओशो नहीं तो कोई और सही। ऐसो मतो हमारो।।
वैसे ताऊ संबोधन पर हरियाणा का एकाधिकार नहीं है। हम ताऊ को अधिक सम्मान देकर उनके आगे जी लगाते हैं। पिताजी से छोटे अगर चाचाजी हुए तो पिताजी से बड़े ताऊ जी।
रिश्ता संबोधन का भूखा नहीं! कुछ लोग पिताजी को बाबू जी कहते हैं तो कुछ पापा और कुछ डैडू। दादा जी भी आजकल आधुनिक होते होते दादू हो गए हैं, और नाना नानू।
जब ताऊ की बात होगी, तो दाऊ का भी जिक्र जरूर होगा! कृष्ण के बड़े भाई थे दाऊ। मैया मोहे दाऊ बहुत खिजायो। फिर ताऊ तो पिताजी के बड़े भाई हुए। यह भी संयोग ही है कि ताऊ और दाऊ का संबंध भी कुरुक्षेत्र ही से है। कल दाऊ थे, आज ताऊ हैं।।
हम जात-पांत को नहीं मानते! लेकिन धरम पाजी जाट हैं, यह तो वे खुद भी मानते हैं। केवल हरियाणा में ही नहीं, राजस्थान और पंजाब में भी जाट बहुतायत से हैं। सेना में एक जाट रेजिमेंट भी है और उनकी देशभक्ति पर शंका नहीं की जा सकती। ढाई किलो का हाथ आखिर किसका है? फिल्म शहीद का वह गीत याद कीजिए! पगड़ी संभाल जट्टा, तेरा लुट गया माल।।
ताऊ बिना पगड़ी के नहीं होते! खाट, लाठी और हुक्का ही इनकी पहचान होती है।
हरियाणा में कोई ताऊ यूं ही नहीं बन जाता! पहले उसे लाल बनना पड़ता है। आपातकाल के बंसीलाल को कौन भूल सकता है। ताऊ शब्द की गरिमा को अगर किसी ने हरियाणा में निभाया है, तो वे हैं एकमात्र देवीलाल। बाद में तो एक भजनलाल भी हुए हैं, जो भजन करते करते पूरी पार्टी सहित ही दलबदल कर बैठे।
लाली तेरी लाल की
जित देखूं तित लाल
लाली देखन मैं चली
मैं भी हो गई लाल
अगर हरियाणा के इन तीनों लालों के राष्ट्रीय योगदान पर प्रकाश डाला जाए तो एक नहीं तीन उपनिषद् की रचना हो सकती है। इनमें सबसे वरिष्ठ देवीलाल जिन्हें देश सम्मान से ताऊ कहता था, ने अगर देश के उप-प्रधानमंत्री पद को सुशोभित किया, वहीं दूसरे लाल भजनलाल तीन बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे।।
पूत के पांव पालने में! देवीलाल के लाल ओमप्रकाश चौटाला ने पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री का पद संभाला। लालू की तरह हरियाणा के, ये लाल भी आज जेल की शोभा बढ़ा रहे हैं।।
भारत माता के 135 करोड़ लाल हैं, कोई मोती है, कोई जवाहर है, तो कोई लाल बहादुर है। लाल जब छोटे होते हैं, तब उन्हें लल्ला भी कहते हैं! बड़े होने पर इनमें से कुछ लाला भी निकल जाते हैं। कोई पंजाब केसरी लाला लाजपतराय कहलाता है, तो कोई लाला अमरनाथ। कितने लोगों ने Hints for Self Culture, के लेखक, स्वतंत्रता सेनानी लाला हरदयाल का नाम सुना है। ईश्वर किसी को फिल्म उपकार के किरदार कन्हैयालाल वाला लाला न बनाए। भले ही एम डी एच के मसाले वाला साफा धारी लाला धर्मपाल गुलाटी ही क्यूं न बना दे।
जो जाट है, उसके ठाठ हैं! हमारे मुख्य चरित्र ताऊ को सम्मान के साथ चौधरी भी कहते हैं। वे सिर्फ देवीलाल नहीं चौधरी देवीलाल थे। कुछ चौधरी, लाल नहीं, सिंह भी होते हैं। चौधरी चरणसिंह कभी देश के प्रधानमंत्री हुआ करते थे। नाम की महिमा देखिए, किसी चौधरी के चरण, जब सिंहासन तक पहुंचते हैं, तो वे सिंह नहीं चरणसिंह हो जाते हैं।।
जो ताऊ है, वही चौधरी है, और वही देश का सच्चा लाल भी है। देवी जिसका नाम है, हरियाणा का वह लाल है। ऐसे सभी
ताऊ चौधरियों को बारम्बार प्रणाम है।।
( सभी ताऊ-ओं को सादर समर्पित )
© श्री प्रदीप शर्मा
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