श्री संजय भारद्वाज
(“साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच “ के लेखक श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है। साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।श्री संजय जी के ही शब्दों में ” ‘संजय उवाच’ विभिन्न विषयों पर चिंतनात्मक (दार्शनिक शब्द बहुत ऊँचा हो जाएगा) टिप्पणियाँ हैं। ईश्वर की अनुकम्पा से आपको पाठकों का आशातीत प्रतिसाद मिला है।”
हम प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते रहेंगे। आज प्रस्तुत है इस शृंखला की अगली कड़ी। ऐसे ही साप्ताहिक स्तंभों के माध्यम से हम आप तक उत्कृष्ट साहित्य पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे।)
☆ संजय उवाच # ३३८ ☆ पर्यावरण दिवस…
– दो वर्ष पहले पर्यावरण महोत्सव में आपके एकल काव्य पाठ ने श्रोताओं का मन जीत लिया था। जैसे आपसे पहले बात हुई थी, इस वर्ष भी 5 जून को उसी स्थान पर आपका काव्य पाठ आयोजित होगा। नई सजावट के साथ कार्यक्रम स्थल की कुछ तस्वीरें भी आपको भेजी थीं।
– हाँ मैंने देखीं पर यह आयोजन स्थल तो भिन्न लग रहा है। यह कोई हॉल जैसा है। लग्जरी कुर्सियाँ लगी हैं। मंच बना हुआ है। एसी भी दिख रहा है। 2 वर्ष पहले तो मैंने विशाल बरगद के नीचे माटी के चबूतरे पर खुले में कविता पाठ किया था।
– जी हाँ, यह वही स्थान है। क्या है न कि खुले में मच्छर काटते थे। अचानक बारिश-अँधड़ आने का डर लगा रहता, सो अलग। इसलिए बरगद कटवा कर छोटा-सा एसी हॉल बनवा दिया है। इससे कवि को रचना सुनाने का और श्रोताओं को कविता सुनने का अधिक आनंद आएगा। एकॉस्टिक सिस्टम के प्रभाव से प्रस्तुति भी अलग ही स्तर की होगी। सारी व्यवस्था देखकर आपको बहुत अच्छा लगेगा।
– क्षमा कीजिएगा मैं नहीं आ पाऊँगा।
– अरे ऐसा क्या हो गया? तैयारी में या आपकी सुविधा में कुछ कमी दिख रही है क्या?
– एक तो मैं केवल संवेदनशील लोगों के बीच कविता पढ़ता हूँ। दूसरे, कथनी से नहीं अपितु करनी से मनाता हूँ मैं पर्यावरण दिवस, कहकर उसने फोन रख दिया।
© संजय भारद्वाज
अपराह्न 12:56 बजे, 15 मई 2025
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
१७ मई से ज्येष्ठ अधिकमास आरंभ हुआ है। इसी दिन से नारायण साधना आरंभ होगी। इसका मंत्र है – ॐ नारायणाय नम:।
इसके साथ मौन साधना एवं आत्म परिष्कार भी चलेंगे। अपनी हर निर्बलता पर विजय पाने का साधन है आत्म परिष्कार। इसका नियमित अभ्यास रखे
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संस्थापक संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





