श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए साप्ताहिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “सांसों की धड़कन।)

?अभी अभी # 501 ⇒ सांसों की धड़कन ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

जड़ और चेतन से मिलकर यह सृष्टि बनी है, लेकिन कहीं कहीं जड़ में भी चेतनता है। हमारा शरीर भी तो जड़ ही है, अगर इसमें चेतना ना हो। पेड़ पौधों की मूल प्रवृत्ति जड़ ही तो है। जड़ रूट को भी कहते हैं। अगर किसी वृक्ष को जड़ से ही काट दिया जाए, तो उसकी चेतनता नष्ट हो जाएगी। जड़ को चेतन एक बीज बनाता है।

पांच तत्वों से बने हमारे इस शरीर के भी दो मुख्य भाग हैं, धड़ और सिर। हम नाक से सांस लेते हैं, तब हमारा दिल धड़कता है। जब फेफड़ों में हवा भरती है, तब ही तो दिल की धड़कन सुनाई देती है।।

अगर सांस चलना बंद हो जाए, तो दिल की धड़कन भी रुक जाए। एक मशीन की तरह अनवरत हमारी सांस चलती रहती है और दिल धड़कता रहता है।

हमें अपनी सांस चलने का आभास भी तब ही होता है, जब अधिक शारीरिक परिश्रम से हमारी सांस तेजी से चलने लगती है।

इधर सांस तेजी से चली, उधर दिल भी तेजी से धड़कना शुरू कर देता है। अजीब रिश्ता है सांसों का दिल से।

इधर सांस फूली, उधर दिल की धक धक शुरू। थोड़ा सुस्ताए, इधर सांस थमी, उधर दिल को भी सुकून मिला। वैसे तो सांस के आने जाने, और दिल के धड़कने को केवल महसूस ही किया जा सकता है, लेकिन वाह रे, दिल और सांस का रिश्ता।।

लोग जब किसी को अपने दिल में जगह दे देते हैं, यानी बिठा लेते हैं, तब वह उसकी सांसों में भी समा जाता है। दिल की ऐ धड़कन ठहर जा, मिल गई मंजिल मुझे। केवल दिल के मरीज का ही दिल धक धक नहीं करता, एक प्रेमी का भी करता है।

जिसको आप अपनी जान दे बैठे हो, वह आपके दिल और सांसों में समा गया है। हम दिल दे चुके सनम ;

दिल चीज क्या है

आप मेरी जान लीजिए।

बस एक बार मेरा कहा

मान लीजिए।।

धड़का तो होगा दिल, किया जब होगा तुमने प्यार। क्या किसी का नाम सांसों में भी लिखा जा सकता है। अजीब दुनिया है यह सांसों की और धड़कन की। अजी आप यकीन नहीं करोगे, हमारा दिल तो सोचता भी है। मुलाहिजा फरमाइए ;

जरा सी आहट होती है

तो दिल ये सोचता है।

कहीं ये वो तो नहीं

कहीं ये वो तो नहीं।।

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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