श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए साप्ताहिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “मोनालिसा।)

?अभी अभी # 588 ⇒ मोनालिसा ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

मोनालिसा, इतालवी चित्रकार लियोनार्दो दा विंची की पेंटिंग है. यह पेंटिंग 16वीं शताब्दी में बनाई गई थी. यह दुनिया की सबसे चर्चित पेंटिंगों में से एक है. यह पेंटिंग फ़्लोरेंस के एक व्यापारी फ़्रांसेस्को देल जियोकॉन्डो की पत्नी लीज़ा घेरार्दिनी को देखकर बनाई गई थी. यह पेंटिंग फ़िलहाल पेरिस के लूवर म्यूज़ियम में रखी हुई है। इसकी रहस्यमयी मुस्कान ही इस पेंटिंग की जान है।

आज आपको घर घर में यह नाम मिल जाएगा। कहीं एक बहन का नाम अगर मोना है, तो दूसरी का लिसा। हमारे चलचित्र के खलनायक आदरणीय अजीत जी का तो आदर्श वाक्य ही मोना डार्लिंग था। ।

उधर प्रयाग राज के महाकुंभ में भी एक माला बाला प्रकट हुई है, जो अपनी मोनालिसाई मुस्कान के कारण चर्चित हुई जा रही है। सोचिए, करोड़ों साधु, संन्यासी और श्रद्धालुओं का सैलाब, और सबके हाथ में कैमरा। इतने पत्रकार, देसी विदेशी टीवी रिपोर्टर, इनकी आंखों से बच पाना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है।

काहे का कुंभ और काहे का अमृतपान, जिसे देखो वही इस मोनालिसा की तस्वीर अपने कैमरे में कैद कर रहा है, और आम और खास को परोस रहा है।

जो महाकुंभ में नहीं जा पाए, वे इसी माला वाली बाला की झील सी आंखों में डुबकी लगाना चाहता है। ।

इतना ही नहीं, महाकुंभ की इस मोनालिसा पर कविता, ग़ज़ल, कथा कहानी और व्यंग्य तक का सृजन हो चुका है। सिर्फ एक तस्वीर वायरल होती है और इंसान आम आदमी से सेलिब्रिटी बन जाता है।

मैं भी पशोपेश में हूँ, आज लोग किस मोनालिसा को देखना चाहते हैं, विंची की मोनालिसा तो हमारे लिए कब की पुरानी हो चुकी, आज तो घर घर जिसका चर्चा है, वह तो बेचारी एक साधारण सी महाकुंभ में माला बेचने वाली लड़की है। भविष्य के गर्त में क्या है, कोई नहीं जानता, लेकिन पारखी लोग महाकुंभ में से भी अनमोल रत्न निकाल ही लाते हैं। ।

यह मंथन हम बाद में करेंगे, इस महाकुंभ के स्नान से कितने श्रद्धालुओं को अमृत की बूंद प्राप्त हुई, फिलहाल आज का दिन तो, आज की मोनालिसा का ही है …!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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