श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘चांद, कितने सुंदर थे तुम…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १२९ ☆
☆ चांद, कितने सुंदर थे तुम… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
सबको प्यारे लगते थे,
कोई तुम्हें मामा कहता था,
कोई तुम्हें सुंदरता की उपमा देता,
चांद कितने सुंदर थे तुम,
जब कभी तुम झील में उतर कर आते थे,
तुम्हारी सुंदरता का बखान ही नहीं था,
जब तुम आसमान पर अपनी सुंदर छठा बिखेरते थे,
तब कितने सुंदर थे तुम,
कोई तुम्हें सुंदरता का पर्याय कहता था,
कोई तुम्हें चांदनी का दाता कहता था,
पर ये तभी तक था जब तुम,
हम इंसानों से दूर थे,
क्योंकि दूर से ही हर चीज सुंदर लगती है,
पर जब तुम इंसान के पास आ गए,
इंसान तुम पर पहुंच गया,
अब तुम्हें कोई सुंदरता की उपमा नहीं देता,
यही तो इंसान का स्वभाव है,
जो चीज मिल जाती है,
फिर वह, उसकी कीमत नहीं करता,
पर मेरी नजर में,
तुम पहले भी सुंदर थे,
तुम सुंदर हो ,
और हमेशा सुंदर रहोगे.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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