श्री संजय भारद्वाज

(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) 

प्रत्येक बुधवार और रविवार के सिवा प्रतिदिन श्री संजय भारद्वाज जी के विचारणीय आलेख एकात्मता के वैदिक अनुबंध : संदर्भ – उत्सव, मेला और तीर्थयात्रा   श्रृंखलाबद्ध देने का मानस है। कृपया आत्मसात कीजिये। 

? संजय दृष्टि – एकात्मता के वैदिक अनुबंध : संदर्भ- उत्सव, मेला और तीर्थयात्रा भाग – 39 ??

वैष्णो देवी-

जम्मू कश्मीर के त्रिकुट पर्वत पर स्थित है माँ वैष्णवी का मंदिर जो कालांतर में वैष्णो देवी के रूप में प्रतिष्ठित हुईं। वैष्णो देवी का मंदिर जम्मू के कटरा नगर में है। सामान्यतः इसकी यात्रा रात में होती है। पूरी रात चढ़ाई करनी होती है। आजकल यात्रा का बड़ा भाग हेलीकॉप्टर या बैटरी कार से पूरी करने की व्यवस्था भी है। माता की मूर्ति गुफा में है जिसका प्रवेशद्वार अत्यंत संकरा है। प्रतिवर्ष भारी संख्या में यात्री यहाँ दर्शनार्थ आते हैं।

अमरनाथ-

जम्मू कश्मीर में स्थित बाबा अमरनाथ की गुफा हिंदुओं के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों में से एक है।  मान्यता है कि इसी गुफा में महादेव ने माँ पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था। भुरभुरी बर्फ की गुफा में प्राकृतिक रूप से ठोस बर्फ से 10 फुट का शिवलिंग यहाँ बनता है। यही कारण है कि अमरनाथ को बाबा बर्फानी भी कहा जाता है। आषाढ़  से श्रावण पूर्णिमा तक पह यात्रा चलती है।

माना जाता है कि अमरनाथ गुफा की खोज एक मुस्लिम गड़ेरिया ने की थी। इस अन्वेषी के परिजनों को बाबा बर्फानी के कुल चढ़ावे का एक चौथाई भाग आज भी दिया जाता है। धार्मिक भेदभाव की संकीर्णता से परे  वैदिक दर्शन की आँख में बसा यह कल्पनातीत एकात्म भाव, मानवजाति की आँखें खोलने वाला है।

अयोध्या-

मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की नगरी है अयोध्या। इसे अवध भी कहा जाता है। अयोध्या मनु महाराज द्वारा बसाया गया नगर है। अयोध्या का अर्थ है, जिसे युद्ध अथवा हिंसा से न प्राप्त किया जा सके। इस नगर में श्रीराम जन्मभूमि, करोड़ों सनातनियों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र है। इसके अतिरिक्त कनक भवन, हनुमानगढ़ी, श्री लक्ष्मण किला, दशरथ महल जैसे आकर्षण के अनेक केंद्र हैं।

श्रीराम भारतीयता के प्राणतत्व हैं। बच्चे के जन्म पर रामलला की बधाई गाता और अंत्येष्टि में ‘रामनाम सत है’ का घोष करता है भारतीय समाज। अवधनगरी में तो श्वास-श्वास राममय है।

श्रीराम ने बंधु, सखा, वनवासी, वानर, टिटिहरी सबको एक भाव से देखा। रघुनाथ का जीवन एकात्मता का शिलालेख है।

क्रमश: …

©  संजय भारद्वाज

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार  सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय  संपादक– हम लोग  पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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अलका अग्रवाल

एकात्मकता की शिक्षा देते वैष्णवी देवी मंदिर, अमरनाथ या बर्फानी बाबा और रामायण अयोध्या नगरी। सबको शत शत प्रणाम। अप्रतिम आलेख।