डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – किसान।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # २९९ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – किसान ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
☆
पकी धान की बालियाँ, सहती है हालात।
बेमौसम बरसात ने, दिया बड़ा आघात।।
*
बदली कैसी चाल है, बदले मौसम रंग।
पकती फसलें डूबती, कृषक हुए हैं तंग।।
*
सोचा बिल्कुल ही नहीं, होगी अब बरसात।
बरसे बादल शोक के, बदल गए हालात।।
*
खेतों में सोना उगे, यही कृषक उपहार।
बारिश में सब बह गया, उजड़ गया संसार।।
☆
© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120, नोएडा (यू.पी )- 201307
मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






