सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – बावरा मन चाहता…।
रचना संसार # ७१ – गीत – बावरा मन चाहता… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
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प्यारी कविता
प्यारी कविता सम सुख-सरिता,
तुम्हीं साधना हो मेरी।
हो अनुपम-अनुभूति हृदय की,
तुम्हीं भावना हो मेरी।।
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कविता है दर्पण समाज की,
शत-शत है नमन कामिनी।
चंदा सी हो श्यामल उज्ज्वल।
चिर कालिक दमक दामिनी।।
ओज दिव्य दिनकर जैसा है,
पूर्ण कामना हो मेरी।
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सौम्य सुसंस्कृत भाषा कविता,
ज्ञान ज्योति पूजा थाली।
तोड़ रूढ़ियों को चलती है,
देवनागरी मतवाली।।
अनुशासन प्रिय प्रखर तूलिका,
तुम उपासना हो मेरी।
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वाल्मीकि रसखान जायसी,
कवि भूषण पंत निराला।
रसमय मेघदूत वरदानी,
बच्चन-उर की मधुशाला।।
सूर महादेवी मीरा की,
धवल कामना हो मेरी।
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बहुरंगी सौन्दर्य प्रकृति का,
काव्यमयी सुधा बिहारी।
कस्तूरी सौरभ उपवन की,
गीत छंद की फुलवारी।।
सदियों से भव भक्ति समाहित,
तुम्हीं याचना हो मेरी।
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मुक्ति बोध के दीप जलाए,
हो इतिहास अमिट सारा।
वीरों की गाथा को गाती,
निर्मल गंगा की धारा।।
शुचिता की मानक परिभाषा,
तुम्हीं प्रार्थना हो मेरी।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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