स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – सुरक्षा…।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २६७ – सुरक्षा ✍

(काव्य संग्रह – शब्द नहीं रहे शब्द से )

प्रिय

बंधु बांधवी

आप

भारत भूमि के

आदिवासी नहीं आदि अधिकारी हो

चाहे आपका निवास हो

झारखण्ड

या सरगुजा

या

बस्तर के अबूझमाड़ में

आपके प्राण बसते हैं

नदी, पहाड़ या झाड़ में

आपके कारण ही सुरक्षित हैं

वन सम्पदा

और संस्कार ।

 

© डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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