श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १६४ ☆ देश-परदेश – बिका हुआ समान वापिस नहीं होगा ☆ श्री राकेश कुमार ☆

उपरोक्त सूचना अधिकतर दुकानों पर लगे हुए बोर्ड पर प्रमुखता से लिखी हुई मिल जाती हैं। आजकल तो इसके स्टीकर भी मिलते हैं।

अब समय ऑनलाइन का हो गया है, मतलब जिस सामान को देखा भी नहीं उसको भी क्रय कर लो। वापसी में भी कोई कठिनाई नहीं होती हैं। हम तो एक दो बार गर्म स्वेटर बिना स्टीकर उतारे उपयोग कर वापस भुना लेते हैं। नए कपड़े पहने हुए फोटो अपने मोबाइल की डी पी या फेस बुक में चिपका कर अपनी रईसी का परचम लहराते रहते हैं।

इस कड़कती ठंड में मुफ्त का मॉल डकारने के लिए ऑनलाइन एक जैकेट मंगवा कर उसका विवाह में उपयोग भी कर किया। जब उसकी जेब में हाथ डाला तो उसमें एक हरा पांच सौ का नोट पड़ा मिला था। वो ही नोट विवाह के शगुन में काम आ गया। रात्रि वापसी पर जब हमारा हैंगओवर कम हुआ, तब हमारी समझ में आया ये जैकेट हमसे पूर्व भी किसी ने ऑनलाइन मंगवाकर उपयोग करके वापसी कर दी होगी। कुल मिलाकर हमने सैकंड हैंड कपड़े उपयोग किए।

विदेश में तो कपड़े इत्यादि लम्बे समय तक भी वापिस ले लिए जाते हैं। एक बार मित्र ने जब छह माह पहले खरीदी हुई कमीज़ वापिस की तो दुकानदार ने तीस प्रतिशत काट कर राशि वापिस करने की जानकारी दी क्योंकि वो शर्ट अब तीस प्रतिशत डिस्काउंट पर दुकान में विक्रय हो रही थी। मित्र ने कुछ बहाना बताकर कमीज़ वापसी नहीं करी थी। विदेशों में तो शहर के मध्य में ऑनलाइन विक्रेताओं ने सिर्फ वापसी के लिए अलग से दुकानें तक भी खोल कर सुविधा प्रदान करी हुई हैं।

आप तो बस बिना आवश्यकता के खरीदी करो, वापसी, उधार, डिस्काउंट जैसे लुभाने वाले अनगिनत ऑफर आप की सेवा में हाजिर हैं।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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