श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १७० ☆ देश-परदेश – Returnable Bottles ☆ श्री राकेश कुमार ☆
गर्मी का सीज़न इस बार भी निर्धारित समय से पूर्व ही आ गया है। दूसरी और पश्चिम एशिया का युद्ध भीषणतम हो कर गर्मी बढ़ाने में वैसा ही कर रहा है, जैसे कि जलती आग में घी करता है।
हमारे घर में विगत कुछ वर्षों से तथाकथित “शीतल पेय” का सेवन व्हाट्स ऐप महाविद्यालय से मिले ज्ञान से बंद हो चुका है। खाना बनाने वाली गैस की कमी के चलते घर में चाय के सेवन पर प्रतिबंध की चर्चा परवान चढ़ चुकी है। इसी क्रम में शीतल पेय की यादें ताज़ा हो गई हैं।
साठ के दश्क में कोका कोला, ऑरेंज (फेंटा नहीं) और सोडा कांच की बोतलों में उपलब्ध रहता था। सोडा दो आने और अन्य चार आने में बिक्री होती थी। दुकानदार कांच की बोतल के नाम से सिक्योरिटी डिपोजिट जमा करवा लेता था। बोतल की सही सलामती पर उस राशि की वापसी संभव हुआ करती थी। बोतल के ढक्कन हटाने पर ज़रा सा भी कांच टूटने से राशि काट कर बोतल ग्राहक को थमा दी जाती थी। कुछ अमीर विवाह आदि कार्यक्रमों से खाली बोतल घर ले आते थे। जब कभी बाजार से शीतल पेय खरीदते तो घर रखी खाली बोतल घर से साथ ही ले जाते थे, और सिक्योरिटी जमा करने से बच जाते थे। इन कांच की बोतलों को खोलने वाले छोटे से यंत्र को ओपनर कहा जाता था। हमारे जैसे किशोर तो मुंह में लगे हुए दांतों की दाढ़ के सहारे ही बोतल खोल लेते थे। पड़ोस के लोग भी हमारी सेवाएं ले कर उसकी एवज में थोड़ा सा पेय दे दिया करते थे।
मोहल्ले के परिचित दुकानदार भी किसी अन्य व्यक्ति की गारंटी देने पर सिक्योरिटी जमा करने की झंझट से मुक्त रहते थे।
अब तो प्लास्टिक युग में शीतल पेय भी विगत कुछ दशकों से प्लास्टिक की बोतलों में विक्रय किया जाता है, हालांकि बोतल खोलते ही इनकी गैस निकल जाती है, वो मज़ा नहीं आता है, जो कांच की बोतलों में हुआ करता था।
इस लेख के माध्यम से अपने मित्रों को संदेश देना चाहता हूं, कि हम जब भी उनके घर पर आएं, तो वो खाने वाली गैस की कमी के नाम पर चाय के स्थान पर शीतल पेय परोस सकते हैं। हमें कोई गुरेज नहीं है।
© श्री राकेश कुमार
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