श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १७१ ☆ देश-परदेश – विश्व निद्रा दिवस : 13 मार्च 2026 ☆ श्री राकेश कुमार ☆
जब निद्रा दिवस की जानकारी मिली तो आरंभ में लगा, ये अवश्य ही कुंभकरण का जन्मदिवस होगा। हमारे जैसे निद्रा प्रेमी उसकी याद में इसको मनाते होंगे।
आखिर, आज वो दिन आ ही गया, जिसका हम पूरे साल भर इंतजार करते करते, सोते ही रहते हैं। इस खुशी को मानने के लिए हमारी पूरी योजना रहती हैं।
सभी संबंधित आवश्यक सामग्री ऑनलाइन मंगवा कर रखी पड़ी रहती हैं। शयन कक्ष की खिड़कियों को मोटे पर्दे से ढकना हो, या आंख पर पहनने वाली पट्टी से लेकर कान में ठूसने वाली रुई, सब तैयार हैं।
घर के द्वार पर बाहर से ताला लगवा दिया जाता हैं। टीवी, मोबाइल, पेपर सब कोसों दूर रख कर सोने की शुरुआत होती हैं।
भरपेट गरिष्ठ भोजन के पश्चात मीठी लस्सी की ओवरडोज लेकर, वातानुकूल कमरे में नींद लेने में सहायक सभी उपकरणों का उपयोग कर, मखमली शैय्या पर शांत चित्त लेटते ही, दूसरी दुनिया में चल देते हैं।
कितना मज़ा आता है, इसकी कल्पना करना भी संभव नहीं हैं। आप भी इसका आनंद लेवें।
अभी आंखें बंद ही हुई थी, हमारे कमरे के दरवाजे पर इतनी तेज आवाज़ आई, मानो पश्चिम एशिया की कोई मिसाइल हमारे कक्ष के दरवाजे के बाहर गिरी हैं। हड़बड़ाहट के मारे गिरते पड़ते दरवाजा खोला, बाहर श्रीमती जी खाली गैस के सिलेंडर के साथ खड़ी थी, और बोली गैस एजेंसी जाएं और सिलेंडर भरवा कर आए, ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम बंद पड़ा है, घर में गैस खत्म हो गई, अब खाना नहीं बन सकता हैं।
मरता क्या ना करता, खाली सिलेंडर लेकर डीलर के यहां कूच कर रहें हैं।
© श्री राकेश कुमार
संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)
मोबाईल 9920832096
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






