श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘स्वतंत्रता का सौभाग्य…‘।)
☆ शशि साहित्य # ३५ ☆
कविता – स्वतंत्रता का सौभाग्य… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
☆
ऐसे ही तो नहीं मिला,
यह सुखद एहसास,
स्वतंत्र हवा में ले रहे,
हम जो यह हर सांस.
असंख्य लाड़लों ने देकर बलिदान,
रचा है यह स्वर्ण इतिहास,
उनकी कुछ तारीफ करूं..!!!
मेरी कहां बिसात.
कुछ श्रद्धा सुमन अर्पित हैं,
हाथ जोड़कर आज.
विरासत में मिला हमें,
जो आजादी का साज,
कयामत तक सजा रहे,
भारत मां का ताज.
अग्रिम पीढ़ी को देना है,
समृद्ध भारत का यह राज.
क्या-क्या मोल चुकाया है,
तब गा पाये यह गान.
हर पीढ़ी इस मूल्य को समझे,
ध्वज तिरंगा हमारी शान,,
अनंत काल तक गूंजता रहे,
जन गण मन संग आन बान और शान… 🙏🏻
☆
© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





