श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १९२ – देश-परदेश ☆
☆ त से तोता ☆ श्री राकेश कुमार ☆
आज प्रातः फ्लैट की बालकनी से पास के एक घर की छत पर तोतों का झुंड बैठा हुआ देखकर, हमारी दादी द्वारा पाले गए तोते की याद आ गई। घरों में पाला जाने वाला सबसे प्रिय पक्षी हमारा तोता। प्यार से इसको मिट्ठू भी बुलाया जाता है। “हरे रंग का है, ये तोता” बच्चों की एक पसदीदा कविता हुआ करती थी, अब तो “जैक एंड जिल” का समय भी जा चुका है।
पौराणिक कथाओं में राक्षस की जान तोते में हुआ करती थी। हमारे बॉलीवुड ने भी तोते का उपयोग अधिकतर “तोता मैना” के रूप में किया था। कहानियों में भी बहेलिये और तोते के बहुत सारे किस्से पढ़े और सुने थे।
तोते की संगत उसको राम राम कहना या फिर भद्दे शब्द भी सिखा देती है। कार्यालयों में जो लोग, उच्च अधिकारियों के करीब रहते है, उनको भी तोता कहा जाता है। जब किसी कार्यक्रम में जो लोग आयोजकों की तारीफ़ में कशीदे पढ़ने लग जाते हैं, उनको भी तोते की संज्ञा मिल जाती है।
यदि मुहावरों की बात करें, तो तोते के ऊपर बहुत सारे मुहावरे बन चुके हैं, जैसे कि तोता पालना, हाथ के तोते उड़ जाना, तोते की तरह आंखें फेरना, रट्टू तोता आदि। महिलाओं ने भी तोते के नाम से ही “तोतिया” रंग ईजाद कर दिया है। “तोतिया नाक” शब्द भी व्यक्ति के नयन नक्श की जानकारी देने के लिए उपयोग होता हैं।
तोते द्वारा पेड़ों पर कुछ फलों को चोंच मार दी जाती है। फल विक्रेता उसको सबसे मीठा होने का सर्टिफिकेट देकर, क्रेता को उल्लू बना देते हैं। तोतापरी आम की एक किस्म का रंग तोते जैसा ही होता हैं।
तोता पुराण को अब विराम देते हैं, वर्ना कुछ लोग हमें भी तोते का तोता कहने लग जायेंगे।
© श्री राकेश कुमार
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