डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – श्राद्ध पक्ष।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३४०– साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – श्राद्ध पक्ष ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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मिले बुजुर्गों का हमें, छतरी रूपी हाथ।
हरदम ऐसी कामना, रहें हमेशा साथ।।
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श्राद्ध पक्ष में हम करें, करें पिंड का दान।
पितरों का तर्पण करें, करते वो कल्याण।।
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करकशता है काग की, बनी यही पहचान।
फिर भी मिलता है उसे, श्राद्धपक्ष सम्मान।।
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गौ का ग्रास निकालते, काग श्वान का भाग।
आस लगाए बैठते, गौ माता अरु काग।।
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श्रद्धा प्रादुर्भाव से, श्राद्ध पक्ष में आज।
पुरखों के आशीष से, बनते बिगड़े काज।।।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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