डॉ. वंदना पाण्डेय दुबे

परिचय 

शिक्षा – एम.एस.सी. होम साइंस, पी- एच.डी.

पद : प्राचार्य,सी.पी.गर्ल्स (चंचलबाई महिला) कॉलेज, जबलपुर, म. प्र. 

विशेष – 

  • 39 वर्ष का शैक्षणिक अनुभव। *अनेक महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के अध्ययन मंडल में सदस्य ।
  • लगभग 62 राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध-पत्रों का प्रस्तुतीकरण।
  • इंडियन साइंस कांग्रेस मैसूर सन 2016 में प्रस्तुत शोध-पत्र को सम्मानित किया गया।
  • अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान शोध केंद्र इटली में 1999 में शोध से संबंधित मार्गदर्शन प्राप्त किया। 
  • अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एनकरेज’ ‘अलास्का’ अमेरिका 2010 में प्रस्तुत शोध पत्र अत्यंत सराहा गया।
  • एन.एस.एस.में लगभग 12 वर्षों तक प्रमुख के रूप में कार्य किया।
  • इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय में अनेक वर्षों तक काउंसलर ।
  • आकाशवाणी से चिंतन एवं वार्ताओं का प्रसारण।
  • लगभग 110 से अधिक आलेख, संस्मरण एवं कविताएं पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

 प्रकाशित पुस्तकें- 1.दृष्टिकोण (सम्पादन) 2 माँ फिट तो बच्चे हिट 3.संचार ज्ञान (पाठ्य पुस्तक-स्नातक स्तर)

☆ “स्वास्थ्य आधी आबादी का…” ☆ डॉ. वंदना पाण्डेय दुबे 

(सेवा पखवाड़ा पर विशेष)

इस समय देशभर में 17 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक “सेवा पखवाड़ा” मनाने का सरकारी ऐलान हुआ है, जिसमें आधी आबादी को ध्यान रखकर ‘स्वस्थ नारी : सशक्त परिवार’ अभियान चलाया जा रहा हैl इस पुनीत यज्ञ में शैक्षणिक संस्था के साथ साथ अन्य सरकारी, गैर सरकारी संस्थाओं को जोड़ने का प्रयास किया गया हैl

आज आजादी के 78 वर्ष पूर्ण होने के बाबजूद स्त्री शिक्षा पर निरंतर बल देने एवं महिला सशक्तिकरण का नारा गुंजायमान करने के बावजूद भी आधी आबादी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैl वस्तुतः ‘स्वास्थ्य’ शब्द का तात्पर्य स्वास्थ्य के विभिन्न आयाम से होता है जिसके अंतर्गत शारीरिक स्वास्थ्य के अतिरिक्त मानसिक, सामाजिक बौद्धिक आदि क्षेत्र आते हैं किंतु सभी प्रकार का स्वास्थ्य का आधार कहीं न कहीं से शारीरिक स्वास्थ्य से आकर जुड़ता हैl कहा भी जाता है “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन निवास करता हैl “

किसी भी राष्ट्र का स्वास्थ्य स्तर जहां पारिवारिक स्वास्थ्य स्तर पर निर्भर करता है वहीं परिवार का स्वास्थ्य काफी हद तक महिलाओं के स्वास्थ्य पर निर्भर करता हैl यह अत्यंत आश्चर्यजनकऔर पीड़ादायक पहलू है कि जिस देश में नारी को देवी स्वरूपा माना जाता है जहाँ “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता” की बात कही जाती है वहीं बालिकाओं और महिलाओं का स्वास्थ्य अत्यंत चिंतनीय हैl एन.एफ.एच.एस.5 के 2019 से 21 के के आंकड़े बताते हैं कि 15 से 49 वर्ष के बीच की 57.3% महिलाएं एनीमिक (खून की कमी ) हैंl 24% मोटापे से एवं बड़ी संख्या में उच्च रक्त चाप, डायबिटिज़, थॉयराइड से संबंधित समस्या से ग्रसित हैंl दुखद बात यह है कि 2015-16 के बाद कुपोषण से जूझती महिलाओं की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ हैl हालांकि कि संस्थागत प्रसव  से मातृ- शिशु मृत्यु दर में कुछ कमी आई हैl

एशिया में भारतीय महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल (गर्भाशय ग्रीवा) कैंसर के मामले सर्वाधिक हैंl दुनिया भर में सर्वाइकल कैंसर से जिन 40% महिलाओं की मृत्यु होती है उनमें से 20 से 23 प्रतिशत भारतीय महिलाएं हैंl मीनूपाज़ के बाद ओस्टियोपोरोसिस होना भी सामान्य रूप से देखा जाता हैl

ज्वलंत प्रश्न यह है कि विश्व में खाद्यान्न उत्पादन में दूसरा स्थान रखने वाला भारतवर्ष जहाँ 81.35 करोड़ जनता को 5 किलो मुफ्त अनाज बांटा जा रहा है, वहां 2023 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत वर्ष 125 देश में 111वें स्थान पर क्यों और कैसे खड़ा है? आंकड़ों के अनुसार 74% आबादी स्वस्थ आहार खरीदने में असमर्थ हैंl बड़ी संख्या में बालिकाएँ और महिलाएं कुपोषण की शिकार हैंl कुपोषित माताएं कुपोषित शिशुओं को जन्म देती हैं और परिणामस्वरूप पीड़ियों तक कुपोषण का चक्र चलता रहता हैl

राष्ट्र का स्वास्थ्य स्तर सुधारने  परिवार की धुरी में स्थित स्त्री के उच्च स्वास्थ्य स्तर पर ध्यान देना आवश्यक हैl महिला स्वास्थ्य स्तर को सुधारने संतुलित आहार स्वच्छता व्यक्तिगत आरोग्य पर ध्यान देना होगाl बालिकाओं एवं  महिलाओं में मासिक धर्म में होने वाले खून एवं पोषक तत्वों जैसे आयरन, केलशियम, प्रोटीन आदि की कमी दूर करने विशेष आहार का प्रबंध कर आवश्यकता की पूर्ति करना आवश्यक हैl महिला सशक्तिकरण के इस दौर में महिलाओं को इस हेतु शिक्षित और जागृत करना जरूरी है साथ ही बदलते परिवेश में अवांछित रूढ़िवादी धार्मिक, सामाजिक-सांस्कृतिक परंपराओं से भी उन्हें मुक्त कराना होगाl जिससे सृष्टि के सृजन को गोद में पालने वाली महिला सशक्त होकर राष्ट्र विकास में अपना योगदान दे सकेl

इस सेवा-पखवाड़ा में ‘विकसित भारत और महिला स्वास्थ्य‘ अभियान में प्रयास का दायित्व हमारा भी होना ही चाहिएl

© डॉ. वंदना पाण्डेय दुबे 

प्राचार्य, चंचलाबाई पटेल महिला महाविद्यालय, जबलपुर

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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