डॉ. अनिल कुमार वर्मा

संक्षिप्त परिचय –

  • शिक्षा : पीएचडी (वास्तु शास्त्र), बी.टेक., एफआईई, एफआईवी, चार्टर्ड इंजीनियर,
  • सम्प्रत्ति : वास्तु/जियोपैथिक स्ट्रेस सलाहकार, प्रॉपर्टी मूल्यांकनकर्ता, पूर्व फैकल्टी, कृषि अभियांत्रिकी कॉलेज, जेएनकेवीवी, जबलपुर, पूर्व चीफ मैनेजर, एसबीआई, भोपाल सर्कल
  • विशेषज्ञता: औद्योगिक/कॉरपोरेट वास्तु एवं जियोपैथिक स्ट्रेस
  • लिखित पुस्तकें: “विजयी चुनावी वास्तु”, “Vastu For Winning Election”
  • टीवी साक्षात्कार: ज़ी बिज़नेस, ज़ी 24 छत्तीसगढ़, आईबीसी 24
  • लेख: टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक भास्कर, जागरण, हरिभूमि, माय प्रॉपर्टी आदि
  • विभिन्न पुरस्कार विजेता

(ई-अभिव्यक्ति के “दस्तावेज़” श्रृंखला के माध्यम से पुरानी अमूल्य और ऐतिहासिक यादें सहेजने का प्रयास है। श्री जगत सिंह बिष्ट जी (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker) के शब्दों में  “वर्तमान तो किसी न किसी रूप में इंटरनेट पर दर्ज हो रहा है। लेकिन कुछ पहले की बातें, माता पिता, दादा दादी, नाना नानी, उनके जीवनकाल से जुड़ी बातें धीमे धीमे लुप्त और विस्मृत होती जा रही हैं। इनका दस्तावेज़ समय रहते तैयार करने का दायित्व हमारा है। हमारी पीढ़ी यह कर सकती है। फिर किसी को कुछ पता नहीं होगा। सब कुछ भूल जाएंगे।”

दस्तावेज़ में ऐसी ऐतिहासिक दास्तानों को स्थान देने में आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। इस शृंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है डॉ अनिल कुमार वर्मा जी का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ पन्ना का जंगल और ट्री हाउस की याद।) 

 ☆  दस्तावेज़ # ३८ – पन्ना का जंगल और ट्री हाउस की याद ☆ डॉ अनिल कुमार वर्मा ☆

वर्ष 1985–86 की बात है। मेरी पोस्टिंग स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की पन्ना शाखा (Diamond Mine Fame)  में हुई थी। यह इलाका घने जंगलों से घिरा था। पेड़ों की अंतहीन कतारें, हरियाली, पक्षियों की चहचहाहट और कभी-कभी दूर से आती जंगली जानवरों की आवाज—सब मिलकर इस जगह को रहस्यमय बना देते थे।

मेरे वहां पहुंचने के कुछ वर्ष पूर्व ही एक स्विस दंपत्ति, अपने व्यापार के सिलसिले, में पनना में रहने आया था। उनका स्वभाव बड़ा ही सौम्य और सरल था, लेकिन सबसे अनोखी बात यह थी कि उन्होंने जंगल के बीच में एक दो मंज़िला ट्री हाउस बनाया। कई पेड़ों को आपस में जोड़कर तैयार किया गया यह घर मानो किसी रोमांचक उपन्यास का हिस्सा लगता था।

एक शाम हम वहाँ पहुँचे। सूरज धीरे-धीरे ढल रहा था। चारों ओर हल्की-सी सुनहरी रोशनी फैली थी। पेड़ों की शाखाओं के बीच से छनकर आती हवा चेहरे को ठंडक पहुँचा रही थी।

जैसे ही हम लकड़ी की सीढ़ियों से ऊपर चढ़े, दंपत्ति ने मुस्कुराकर कहा—

“वेलकम टू आवर होम इन द जंगल!”

ऊपर पहुँचकर मैंने चारों ओर नज़र दौड़ाई। ट्री हाउस की बालकनी से सामने फैला जंगल, दूर चरते हिरण, और आसमान में परिंदों का झुंड—यह सब इतना मनमोहक था कि शब्द कम पड़ जाते।

रात ढलते-ढलते, जंगल का नज़ारा और भी रहस्यमय हो गया। दंपत्ति ने एक लालटेन जलाकर हमें ट्री हाउस के भीतर बिठाया। बाहर अंधेरे में किसी सियार की हुआं-हुआं सुनाई दे रही थी। कभी अचानक झाड़ियों में खड़खड़ाहट होती तो लगता कि कोई जंगली जानवर पास से गुज़र गया।

मैंने उनसे मज़ाक में कहा—

“क्या आपको रात में डर नहीं लगता?”

वे मुस्कुराए और बोले—

“डर? नहीं… हमें तो यहाँ जीवन की असली शांति मिलती है। शहर के शोरगुल से कहीं बेहतर।”

उनकी बात सुनकर लगा, सच ही तो है—यहाँ प्रकृति अपनी पूरी सच्चाई के साथ सामने खड़ी थी।

बैंक की ओर से हमने उन्हें फ्रिज़ का फाइनेंस किया। यह कोई बड़ा सौदा नहीं था, लेकिन इससे हमारे और उनके बीच आत्मीयता का रिश्ता जुड़ गया। असल वजह यह भी थी कि अगर हमें कभी किसी अधिकारी या आगंतुक को ट्री हाउस दिखाना पड़े, तो वे लोग सहज हों और हमें अनुमति देने में कोई हिचकिचाहट न हो।

उस ट्री हाउस की स्मृति अब तक मेरे मन में ताज़ा है—अंधेरे जंगल में लालटेन की हल्की रोशनी, ट्री हाउस की लकड़ी की खुशबू, और प्रकृति के बीच जीवन जीने की सरलता।

आज जब पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो लगता है कि वह अनुभव सिर्फ़ एक बैंकिंग कार्य नहीं था, बल्कि जीवन की सादगी और प्रकृति के साथ घुलने-मिलने का सबक़ भी था।

♥♥♥♥

© डॉ अनिल कुमार वर्मा 

कार्यालय-सह-आवास: बंगला नंबर B 27 चौहान टाउन, जुंनवानी, भिलाई, छत्तीसगढ़ मोबाइल: 9425028600 वेबसाइट: www.askvastu.com

यूट्यूब चैनल: askvastu.com  ईमेल: vermanilg@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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