श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘नव निर्मिती…‘।)
☆ शशि साहित्य # २५ ☆
कविता – नव निर्मिती… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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परिवर्तन का यह दौर चला है,
हेतु नव-निर्माण को…
भाग्य विधाता देता मौका,
किस्मत अपनी लिखने को…
धर्म, मेहनत, लगन अटूट,
चल दो इसी राह को…
है दुश्वार..मगर कठिन नहीं,
भेदना किसी चक्रव्यूह को,
हिम्मत करो निकल चलो,
संग ले उपलब्धि को…
प्रथम युद्ध है खुद से, खुद का,
पूर्ण समर्पित, निभाओ अपने किरदार को,
खुद का दिल भी सह सके,
व्यवहार वही दो अन्य को…
जब हो लेखा-जोखा कर्मों का,
सहर्ष “स्वागतम्” कह सको,
फहरा सको जीत का झंडा,
तैयार करो उस धरती को…
भाग्य अगर लिखना हो खुद का,
निर्मित करो उस स्याही को…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





