श्री प्रदीप शर्मा

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “च ख ना ।)

?अभी अभी # ९७० ⇒ आलेख – च ख ना ? श्री प्रदीप शर्मा  ?

मुख हमारे शरीर का प्रवेश द्वार है। आप इसे सिक्योरिटी चेक भी कह सकते हैं। बत्तीस दांतों के बीच एक जीभ है जो शरीर रूपी नगरी में प्रवेश के पूर्व मीठे शब्दों से आगत का स्वागत करती है। उसके स्टाफ के अन्य सदस्य भी हैं। पहले नाक उसे सूंघती है, फिर आंखें उसे घूरती है, और पश्चात जीभ उसे चखती है। मीठा मीठा गप, कड़वा कड़वा थू।

राम नाम अति मीठा है, कोई गा के देख ले। लीजिए, मीठा चखने के लिए जीभ तैयार है और कोई वहां मीठा गा रहा है। कानों में रस घोल रहा है। एक और प्रवेश द्वार ! कंठ गा रहा है, और स्वाद कानों को मिल रहा है। इतने में कानों में एक स्वर और गूंजता है, कोई पीयो रे पियाला(प्याला) राम रस का। अजीब खेल हैं भाई इस रसना और चखना के। अच्छा समागम है रस और इन्द्रियों का।।

यूं तो यह जबान बीस तालों के बीच बंद रहती है लेकिन जब खुलती है तो बड़ी मुश्किल से काबू में आती है। कुछ होते हैं मौन मोहन, जो इस पर तो लगाम कसते हैं, लेकिन उनकी डोर किसी और के ही हाथों में होती है। वैसे कैंची और छुरी से भी तेज होती है इसकी धार। जब यह जीभ अनशन पर चली जाती है, तो सत्ता रूपी स्वर्ग में भूचाल आ जाता है।

वैसे जीभ का मुख्य काम सिर्फ चखना है। जब यह ललचाती है, तो इसकी तो सिर्फ लार टपकती है, पूरे मुंह में तो पानी भी आ जाता है। पानी पूरी खाता तो मुंह है, लेकिन पूरा स्वाद जीभ ले लेती है। बड़ी चटोरी है यह जीभ। नमक, मिर्ची का स्वाद यह पहचानती है। खट्टे, मीठे और कड़वे की भी इसको खूब पहचान है।।

इसको मीठे के साथ नमकीन भी पसंद है और कड़वे के साथ चखना। मीठे के साथ नमकीन तो समझ में आ गया लेकिन सुना है कड़वा तो यह थूक देती है, फिर कड़वे के बाद भी एक और चखना ! क्या यह डबल सिक्योरिटी चेक है ? अजीब पहेली है यह अथवा कोई कड़वा सच।

बताओ सच सच।

अच्छा चलिए, राम नाम से

ही शुरू करते हैं। राम नाम अति मीठा है और हमने राम रस का प्याला भी पीकर देख लिया। गजब नशा है भाई साहब राम नाम में। लेकिन क्या है आजकल मीठा ज्यादा हजम नहीं होता इसलिए हमने राम की मात्रा थोड़ी कम करके रम का सहारा ले लिया है। रम कड़वी है, लेकिन नशा इसमें भी है। आपने सुना नहीं, जब दिल को सताए गम, तू छेड़ सखी सरगम। बस यह रम ही हमारी वह सरगम है। अगर मीठे के साथ नमकीन तो कड़वे के साथ चखना।।

चखना बुरा नहीं। चखने में मज़ा है, लेकिन जब भी पीना हो तो बस राम रस का ही प्याला पीएं और सबको पिलाएं। दुश्मनी और गम की अंधेरी रातों को भूल जाएं, सुबह का इंतजार करें, राम नाम का मज़ा चखें, सबको चखाएं। रम को हमेशा के लिए राम राम जी और आप सबको सुबह की राम राम जी।

कोई पीयो रे पियाला राम रस का ..!!

♥ ♥ ♥ ♥ ♥

© श्री प्रदीप शर्मा

संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर

मो 8319180002

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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