श्री अजीत सिंह

(हमारे आग्रह पर श्री अजीत सिंह जी (पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन) हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए विचारणीय आलेख, वार्ताएं, संस्मरण साझा करते रहते हैं।  इसके लिए हम उनके हृदय से आभारी हैं। आज प्रस्तुत है आपका शिक्षक दिवस पर एक संस्मरणीय आलेख नमस्ते के नंबर।)

☆ आलेख – नमस्ते के नंबर…  ☆ श्री अजीत सिंह ☆

जम्मू यूनिवर्सिटी में एम कॉम की पढ़ाई कर रहा मेरा बेटा एक दिन अपने एक सेमेस्टर की परीक्षा का रिपोर्ट कार्ड लेकर आया। मैंने कार्ड देखा और पूछा कि एक सब्जेक्ट में उसके मार्क्स कम क्यूं थे। उसने कहा कि वह प्रो वर्मा का सब्जेक्ट था जो ढंग से नहीं पढ़ाते और अक्सर कंप्यूटर पर शेयर मार्केट में बिजी रहते थे। वह पहले भी प्रो वर्मा के बारे में शिकायत करता रहता था।

फिर मैने पूछा कि एक दूसरे सब्जेक्ट में उसके काफ़ी अच्छे नंबर हैं तो उसने कहा, डैडी ये तो नमस्ते के नंबर हैं।

मैने कहा कि वह प्रो वर्मा को नमस्ते कर अच्छे नंबर क्यूं नहीं प्राप्त कर लेता।

बेटा बोला कि उनसे तो सभी विद्यार्थी कन्नी काटते हैं। उनके पास कोई नहीं जाता, बस कहीं यूं ही मिल जाएं तो गुड मॉर्निंग वगैरा कह कर निकल जाते हैं।

मैने समझाने की कोशिश करते हुए कहा कि आदरपूर्ण नमस्ते या गुडमॉर्निंग कहने का अर्थ है कि आप उस प्रोफेसर का सम्मान करते हैं और इसका सीधा प्रभाव आपके अंकों पर पड़ता है। आप टीचर का सम्मान करेंगे तो उसके विषय का सम्मान भी हो जाएगा।

इसका सीधा सा अर्थ यह है कि पढ़ाई में अच्छे स्कोर के लिए अध्यापक का सम्मान पहली शर्त है। सम्मान के अभाव में आपका स्कोर भी अच्छा नहीं होगा।

यह मामला सिर्फ स्कोर तक सीमित नहीं रहा। जब एम कॉम फाइनल एग्जाम का वाइवा हुआ तो इसे लेने गुरु नानकदेव यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर जम्मू यूनिवर्सिटी आए थे। उन्होंने आते ही प्रो शर्मा से कहा कि कुछ दिन पहले उनके यहां इंडियन एक्सप्रेस चंडीगढ़ की टीम आई थी और उसने उनके एम बी ए के पांच विद्यार्थियों को मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव की पोस्ट के लिए चुना था। उन में से चार ने जॉब ज्वाइन कर ली और एक ने नहीं की। उन्होंने प्रो शर्मा से कहा कि क्या वे उन्हें अपने किसी एक विद्यार्थी का नाम बता सकते हैं जिसका वे गहन इंटरव्यू करने के बाद उसका नाम चंडीगढ़ इंडियन एक्सप्रेस को भेज देंगे।

प्रो शर्मा ने नमस्ते करने वाले मेरे बेटे का नाम सुझाया। अमृतसर से आए प्रोफेसर ने गहन परीक्षा ली और उसे योग्य पाए जाने के बाद आखिर में पूछा कि क्या वो नौकरी करना चाहता है। बेटे ने फट से हां कह दी। प्रोफेसर साहिब ने परीक्षा के बाद उसे एक चिट्ठी इंडियन एक्सप्रेस के एच आर हेड के नाम दे दी और इस तरह मेरे बेटे को उसकी पहली नौकरी मिल गई ।

कहानी का निष्कर्ष यह है कि अध्यापक का सम्मान आपको न केवल पढ़ाई में अच्छे मार्क्स दिला सकता है बल्कि आपके रोज़गार का रास्ता भी साफ कर सकता है। हर विद्यार्थी को अपने अध्यापक का सम्मान करना चाहिए। माता पिता को भी अपने बच्चों के अध्यापकों का सम्मान करना चाहिए और बच्चों में ऐसे संस्कार पैदा करने चाहिएं कि वे अध्यापकों का सम्मान करें।

सभी को अध्यापक दिवस की बधाई।

☆ ☆ ☆ 

 © श्री अजीत सिंह

05.09.25

पूर्व समाचार निदेशक, दूरदर्शन हिसार।

मो : 9466647037

26.07.2025

(लेखक श्री अजीत सिंह हिसार से स्वतंत्र पत्रकार हैं । वे 2006 में दूरदर्शन केंद्र हिसार के समाचार निदेशक के पद से सेवानिवृत्त हुए।)

ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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