प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

☆ दोहे फागुन के ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

फागुन आया देह में, जागी आज उमंग।

मन उल्लासित हो गया, फड़क उठा हर अंग।।

*

फागुन लेकर आ गया, प्रीति भरा संदेश।

जियरा को जो दे रहा, मिलने का आवेश।।

*

फागुन की अठखेलियाँ, होली का पैग़ाम।

हर कोई लिखने लगा, चिठिया प्रिय के नाम।।

*

फागुन की मदहोशियाँ, छेड़ें मीठी तान।

हल्का जाड़ा कर रहा, अनुबंधों का मान।।

*

सरसों में आकर्ष है, महुये में है काम।

पवन नेह ले कर रहा, कर्म आज अविराम।।

*

फागुन लिए तरंग है, सबकी बदली चाल।

मौसम ने ऐसा किया, कुछ तो आज कमाल।।

*

बहके-बहके लोग हैं, संयम रहा न आज।

फागुन करने लग गया, हर दिल पर तो राज।।

*

फागुन रंगारंग है, बजें आज तो चंग।

संतों के मन भी चढ़ा, साहचर्य का रंग।।

*

यौवन है हर भाव पर, टूटे सारे बंध।

है स्वच्छंद मधुमास अब, अवमानित सौगंध।।

       

© प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे

प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661

(मो.9425484382)

ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments