डॉ हर्ष तिवारी
जीवन-यात्रा
☆ मेरे पिता मेरा गौरव…☆ डॉ हर्ष कुमार तिवारी ☆
मेरे पिता मेरे लिए सम्मान और गौरव का स्रोत हैं। उनके व्यक्तित्व में साहित्य केवल रुचि नहीं, बल्कि जीवन का संस्कार था हां मैंने जो सहज रूप से मुझ तक आया। शब्दों के प्रति आदर, विचारों की शुचिता और अभिव्यक्ति की मर्यादा मैंने पिता से ही पाई।
संस्कारधानी जबलपुर की साहित्यिक परंपरा में आज भी पिता का नाम आदर के साथ लिया जाता है। उनकी लेखनी, उनका वैचारिक अनुशासन और साहित्य के प्रति उनकी निष्ठा एक ऐसी धरोहर है, जिसे सहेजना मेरा दायित्व है।
मैं स्वयं को उनका पुत्र कहने में गौरव अनुभव करता हूँ। पिता ने जो साहित्यिक संस्कार और धरोहर दी, उसे आगे बढ़ाना ही मेरी साधना है और यही मेरी सच्ची श्रद्धांजलि।
© डॉ. हर्ष कुमार तिवारी
जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






