श्री संजय भारद्वाज
(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं।)
संजय दृष्टि – सर्व धर्म प्रार्थना
सर्व धर्म प्रार्थना का एक अनूठा आयोजन एक दुर्गम ग्लेशियर के निकट रखा गया था। विभिन्न धर्मों के देश-विदेश में बसे चुनिंदा अनुयायियों को इसमें सम्मिलित किया गया था। इन यात्रियों का दल दुर्गम हिमनद की ओर बढ़ रहा था। एकाएक हिम की सतह दरक गई और खाईनुमा गहरा गढ्ढा बन गया। दल गढ्ढे में गिर पड़ा।
हाहाकार मच गया। फिर कुछ समय के लिए यात्रियों के गढ्ढे में गिरने पर चर्चा चली। तत्पश्चात पर्वतारोहियों में हिंदू, मुसलमान, ईसाई, सिख, पारसी, यहूदी, बौद्ध, जैन, ताओ, शिंटो, कन्फ्यूशियिस्ट गिने जाने लगे।
फिर भी मन ना भरा तो विभिन्न धर्मों के यात्रियों के संप्रदाय, जातिगत वर्ग गिने जाने लगे। कुछ ने सवर्ण, दलित, अगड़ा, पिछड़ा, आदिवासी की माइक्रो काउंटिंग शुरू की तो कुछ ने मूल निवासी, आक्रमणकारी, आर्य-अनार्य की गणना भी कर डाली।
अपनी-अपनी जगह बैठे लोग मनुष्य और मनुष्य के बीच की खाई को चौड़ा करते रहे। उधर खाई में पड़े पर्वतारोहियों ने मानव शृंखला बनाई, एक दूसरे का हाथ पकड़ा और बाहर निकल आए।
© संजय भारद्वाज
अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार ☆ सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर ☆ संपादक– हम लोग ☆ पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆
संजयउवाच@डाटामेल.भारत
writersanjay@gmail.com
☆ आपदां अपहर्तारं ☆
गोविन्द साधना शुक्रवार 15 अगस्त से गुरुवार 21 अगस्त तक चलेगी।
इस साधना मेंॐ गोविंदाय नमः का मालाजप होगा साथ ही वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित मधुराष्टकम् का पाठ भी करेंगे।
संभव हो तो परिवार के अन्य सदस्यों को भी इससे जोड़ें
अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं।
≈ संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





