सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – मकड़ी का जाल

? रचना संसार # ९१ – गीत – मकड़ी का जाल…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

जाल मकड़ी का बुना है,

खो गयी संवेदनाएँ।

द्वेष के फूटे पटाखे,

जल रहीं हैं नित चिताएँ।।

*

कर रहे क्रंदन सितारे,

चाँद भी खामोश रहता।

हर तरफ छाया तिमिर की,

अब नहीं कुछ होश रहता।।

आपदा की बलि चढ़े सब,

चल रहीं पागल हवाएँ।

*

शोक घर -घर हो रहा है,

मौत की छाया पड़ी है।

आँधियाँ सुनती नहीं कुछ,

झोपड़ी सहमी खड़ी है।।

छा रही है बस  निराशा,

टूटती सारी लताएँ।

*

भूलती चिड़िया चहकना,

साँस बिखरी कह रहीं अब,

कौन सुरक्षित इस जग में,

पीर अँखियाँ सह रहीं सब

संत्रासों की माया है ,

छा गईं काली घटाएँ।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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