श्री संजय भारद्वाज

(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं।)

? संजय दृष्टि – शाश्वत ? ?

लेखक ने लिखा सत्य।लेखक ने लिखा सिद्धांत। लेखक ने लिखा निष्ठा। लेखक ने लिखा स्वाभिमान। लेखक ने लिखा ध्येय।

समय बीतता रहा। सारे शब्द, लेखक के अस्तित्व में गहरे उतर गए। वह जिया सत्य के लिए, वह जिया सिद्धांत के लिए, वह जिया निष्ठा के लिए, वह जिया स्वाभिमान के लिए, वह जिया ध्येय के लिए।

फिर एक दिन लेखक की देह चिता पर चढ़ी। नश्वर थी, सो जलकर राख हो गई। सत्य, सिद्धांत, निष्ठा, स्वाभिमान, ध्येय चिता की आँच में तपे, निखरे, अदाह्य, अकाट्य, अशोष्य बने, शाश्वत हो गए।

 ?

© संजय भारद्वाज  

रात्रि 1:59 बजे, 10.11.2025

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर संपादक– हम लोग पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स ☆ 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

☆ आपदां अपहर्तारं ☆

🕉️ 6 नवम्बर से मार्गशीर्ष साधना आरम्भ होगी। इसका साधना मंत्र होगा – ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🕉️ 

🕉️ इसके साथ ही हम श्रीमद्भगवद्गीता का पारायण करेंगे। इसमें 700 श्लोक हैं। औसत 24 श्लोक या उनके अर्थ का यदि दैनिक रूप से पाठ करेंगे 💥

अनुरोध है कि आप स्वयं तो यह प्रयास करें ही साथ ही, इच्छुक मित्रों /परिवार के सदस्यों को भी प्रेरित करने का प्रयास कर सकते हैं। समय समय पर निर्देशित मंत्र की इच्छानुसार आप जितनी भी माला जप  करना चाहें अपनी सुविधानुसार कर सकते हैं ।यह जप /साधना अपने अपने घरों में अपनी सुविधानुसार की जा सकती है।ऐसा कर हम निश्चित ही सम्पूर्ण मानवता के साथ भूमंडल में सकारात्मक ऊर्जा के संचरण में सहभागी होंगे। इस सन्दर्भ में विस्तृत जानकारी के लिए आप श्री संजय भारद्वाज जी से संपर्क कर सकते हैं। 

संपादक – हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

1 Comment
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments
Prajesh Kumar Prasad

उत्तम विचार एवं प्रेरणाप्रद हैं । हम सभी का जीवन में एक ध्येय होना ही चाहिए । सभी ध्येयों में मनुष्य का सर्वोत्तम ध्येय है, स्वयं को जान लेना, स्वयं का सत्-परिचय पा लेना । जो संजय जी के लेखों से ऐसी प्रेरणा प्राप्त होती है । हृदय-तल से धन्यवाद एवं आभार संजय जी, आपका । राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे राधेराधे .. 🙏🙏🙏