श्री संजय भारद्वाज

(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। ) 

प्रत्येक बुधवार और रविवार के सिवा प्रतिदिन श्री संजय भारद्वाज जी के विचारणीय आलेख एकात्मता के वैदिक अनुबंध : संदर्भ – उत्सव, मेला और तीर्थयात्रा   श्रृंखलाबद्ध देने का मानस है। कृपया आत्मसात कीजिये। 

? संजय दृष्टि – एकात्मता के वैदिक अनुबंध : संदर्भ- उत्सव, मेला और तीर्थयात्रा भाग – 26 ??

पुस्तक मेला- वाचन संस्कृति के प्रचार में  राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की बड़ी भूमिका है। पाठकों तक स्तरीय पुस्तकें पहुँचाने के लिए न्यास, देश के विभिन्न शहरों में पुस्तक मेला का आयोजन करता है। इन मेलों के माध्यम से लेखक, प्रकाशक और पाठक के बीच एक सेतु बनाता है।

हरेला मेला- उत्तराखंड के कुमाऊँ मंडल में हरेला मेला वर्ष में  तीन बार क्रमश: चैत्र, श्रावण एवं अश्विन में लगता है। इनमें श्रावण माह में ‘भीमताल’ नामक स्थान पर लगने वाले  मेले का विशेष महत्व है। इस मेला में सहभागियों द्वारा  पौधारोपण भी किया जाता है। पर्यावरण संरक्षण-संवर्धन में सक्रिय जनसहभागिता का ऐसा उदाहरण शायद ही विश्व के किसी मेले में देखने को मिलता हो।

कृषि मेला- भारत कृषि प्रधान देश है। विशेषकर ग्रामीण अंचलों में कृषि मेला का विशेष महत्व है। इन मेलों का आयोजन प्राय: सरकार द्वारा किया जाता है। किसान को स्थानीय मिट्टी की वैज्ञानिक जानकारी देना, इस तरह की मिट्टी में किस तरह की फसल अधिक हो सकती है, फसल के लिए कौनसे बाजार उपलब्ध हैं, इन सब की जानकारी सामान्यतः इनमें दी जाती है।  किसानों को उनके खेत के लिए मृदाकार्ड या सॉइलकार्ड देना इन मेलों का एक महत्वपूर्ण उपक्रम है।

पोषण मेला- सरकारी मेला आयोजन के अंतर्गत गाँवों, कस्बों या छोटे शहरों में  समुचित पोषण और स्वास्थ्य के प्रति जागृति के लिए लघु मेलों का आयोजन किया जाता है। राष्ट्रीय पोषण मिशन के अंतर्गत गर्भवती, धात्री, शिशु व किशोरियों में पोषण के महत्व के प्रति जागृति के लिए पोषण मेला लगाया जाता है।

क्रमश: ….

©  संजय भारद्वाज

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार  सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय  संपादक– हम लोग  पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ☆ ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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अलका अग्रवाल

पुस्तक मेला, हरेला मेला, कृषि मेला व पोषण मेला लगने के कारण, स्थान व समय की समुचित जानकारी। अप्रतिम।

लतिका

वाह!
मेले का आधुनिक रूप.?