श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना “प्रेरणादायक…”। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आलेख # 247 ☆ प्रेरणादायक… ☆
सत्य निष्ठ व्यक्ति जब पूर्ण मनोयोग से कोई कार्य करता है तो निश्चय ही उसे मंजिल मिलती है। बस एक दिशा में सही मार्गदर्शक के साथ जुटे रहिए…
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सत्य सार्थक सतत सफलता
साधन सत होता।
कर्म किए जाता जो मानव
कभी नहीं रोता।।
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भूल चूक से मत घबराना
बाधाओं से लड़- लड़ जाना।
कठिन भले लगती हो मंजिल
लक्ष्य प्राप्त कर तुम मुस्काना।।
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बीज हृदय में सच्चाई के
जब – जब भी बोता।
कर्म किए जाता जो मानव
कभी नहीं रोता।।
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अटल सत्य जीना अरु मरना
मानवता की पीड़ा हरना।
लाख गिरें पर उठ- उठ जाना
विषम परिस्थिति धीरज धरना।।
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पापों को अपने आँसू से
निश्छल हो धोता।
कर्म किए जाता जो मानव
कभी नहीं रोता।।
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कर्मपथ पर निरंतर चलते रहिए।
© श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020
मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈



