श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 361 ☆
व्यंग्य – बेबी आन बोर्ड
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
आजकल सड़क पर गाड़ी चलाना उतना ही आसान हो गया है जितना फेसबुक पर रिश्ते बनाना, ना जिम्मेदारी चाहिए, ना योग्यता, बस “स्टेटस” दिखना चाहिए! नया स्कूटर या कार खरीदते ही सबसे पहले आज क्या किया जाता है? नंबर प्लेट नहीं, बीमा नहीं, ना ही हेलमेट की फिक्र… सीधा “L” का स्टिकर चिपका दिया जाता है, वो भी बड़े-बड़े लाल अक्षरों में। ऐसा लगता है जैसे “L” नहीं, ‘लॉर्ड ऑफ द रोड’ की उपाधि हो।
कभी ध्यान से देखिए, जैसे ही कोई कार के पीछे “L” लिखा दिखता है, अन्य वाहन चालक अचानक दार्शनिक बन जाते हैं। “अरे, सीख रहा है बेचारा… जाने दो!” अब वो सीख रहा है या सिखा रहा है, ये अलग बात है। कार के भीतर बैठे “लर्निंग ड्राइवर” के बगल में उसका गुरु नजर ही नहीं आता । ड्राइवर गुरु हुआ भी तो उसका सारा ध्यान मोबाइल पर होता है, बीच-बीच में बोलते हैं, “एक्सेलेरेटर धीरे दबा बेटा…।
कुछ लोगों ने तो इस “L” को लाइसेंस की छूट का पासपोर्ट समझ लिया है। कोई भी गलत दिशा में गाड़ी घुमा दे, कोई वन-वे को टू-वे बना दे, कोई रेड लाइट को सजावट समझ कर पार कर दे, गाड़ी मन चाहे तरीके से पार्क कर लें, बस पीछे “L” लिखा होना चाहिए, जनता और ट्रैफिक पुलिस सब क्षमाशील हो जाते हैं। “लर्निंग है, सीख जाएगा…” जैसे ये ट्रैफिक स्कूल का ऑन-रोड इंटर्नशिप प्रोग्राम चल रहा हो!
एक और नुस्खा प्रचलन में है. कार में पीछे स्टिकर लगा रहे “बेबी आन बोर्ड” वाह! बच्चा कार में है, इसलिए कार को स्पेशल ट्रीटमेंट मिलेगा! बाकी गाड़ियों में यथा स्थिति बुज़ुर्ग ऑन बोर्ड, बीबीऑन बोर्ड, EMI ऑन बोर्ड जैसा कुछ लगवाया जाए तो शायद इन लोगों को भी थोड़ी इंपॉर्टेंस मिल जाए । बेबी आन बोर्ड स्टिकर के साथ गाड़ी के चारों ओर अदृश्य सुरक्षा कवच बन जाता है। सामने से ट्रक आ जाए, या फिर एंबुलेंस, या फायर ब्रिगेड बेबी आन बोर्ड की नजाकत बनी रहती है। हद तो तब होती है जब लोग “L” और “Baby on board” को एक साथ चिपका देते हैं। मतलब अब बच्चा सिखाएगा और ड्राइवर सीखेगा!
एक गाड़ी दिखी जिस पर लिखा था । “मिस ब्यूटीफुल ड्राइविंग ”। हम सोचने लगे कि ड्राइवर मिस ब्यूटीफुल है या कार! जब पास से निकले तो गाड़ी में तीन थे, एक लड़का, एक लड़की और एक तेज परफ्यू की महक।
रजिस्ट्रेशन प्लेट पर नंबर लिखवाने के रंग, आकार के रूल्स भी युवाओं की मर्ज़ी से चलते हैं, चालान बनाए जाते ही मोबाइल हाथ में आ जाता है और किसी नेता या पुलिस अधिकारी से बात करने को कहा जाता है।
“Mr. Rash on Wheels” भी दिखते हैं! कमाल के आत्म-प्रशंसक लोग हैं, जो खुद ही घोषित कर देते हैं कि वे अनियंत्रित हैं, फिर भी आप उनके स्पीड में बहकते स्कूटर को देखकर मुस्कराइए, हॉर्न मत बजाइए ।
सच पूछिए तो ये स्टिकर एक किस्म का हथियार बन गए हैं। एक तरफ “L” लगाकर ड्राइवर कानून की किताब बंद कर देता है, तो दूसरी तरफ Baby on Board लगाकर बाकी चालकों की सहनशक्ति की परीक्षा लेता है। किसी बड़े पद के अधिकारी, विधायक, पार्षद लिखी या पार्टी के झंडे की नंबर प्लेट और सबके बीच भीड़ में गुमशुदा सामान्य आदमी, जो नियम से गाड़ी चलाता है, लाइसेंस साथ रखता है और पार्किंग के लिए नियम मानता है, वो बेचारा ‘L’ वालों की स्पेशल ड्राइविंग देखता है, ‘बच्चे’ वालों के इमोशनल ब्लैकमेल से गुजरता है, और फिर घर पहुँचकर सोचता है “काश! मैंने भी गाड़ी के पीछे ‘Old but Gold’ लिखवा दिया होता।”
तो, अगली बार जब आप गाड़ी खरीदें, तो काग़ज़-पत्तर से पहले एक बढ़िया-सा स्टिकर तैयार करवाइए, जैसे “Slow Poet On Board” या “EMI Paying Legend Driving” क्योंकि आजकल ड्राइविंग में सिर्फ स्किल नहीं, स्टिकर सेंस ऑफ ह्यूमर भी नजर आती है!
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© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
म प्र साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






