श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव
(संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं अग्रज साहित्यकार श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव जी के गीत, नवगीत एवं अनुगीत अपनी मौलिकता के लिए सुप्रसिद्ध हैं। आप प्रत्येक बुधवार को साप्ताहिक स्तम्भ “जय प्रकाश के नवगीत ” के अंतर्गत नवगीत आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है आपके भावप्रवण एवं विचारणीय नवगीत “दोहे”।)
जय प्रकाश के नवगीत # ११६ ☆ दोहे ☆ श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव ☆
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बाढ़ बहा कर ले गई, नाव नदी तटबंध।
मछुआरे के जाल से, मछली के अनुबंध।।
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पानी पानी हो गया, मौसम पानीदार।
पानी के इस खेल में, शामिल थी सरकार।
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कल अख़बारों में छपी, ख़बर सनसनीख़ेज़।
नदी चुराकर ले गई, बूँदों की पाँजेब।।
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आओ बूँदों से करें, बूँदों का श्रृंगार।
दादुर मोर पपीहरा, गायें बूँद मल्हार।।
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झींगुर की आवाज़ में, कजरी गाये रात
पा खेतों के दिन फिरे, बरखा की सौग़ात।।
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मौसम ऋतु के हाथ में देकर कलम दवात।
लिखवाता है बूँद मय, गीत गजल बरसात।।
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© श्री जय प्रकाश श्रीवास्तव
सम्पर्क : आई.सी. 5, सैनिक सोसायटी शक्ति नगर, जबलपुर, (म.प्र.)
मो.07869193927,
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





