डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के मुक्तक – सावन)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३३५ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के मुक्तक – सावन ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

घटा घिरी तो दिल ने तो तेरा नाम लिया है।

बरसी जो बूंदें तो अधरों ने पैगाम लिया है।

सावन की फुहार में तुझे महसूस करता हूँ।

तेरी ही याद ने मुझे फिर से ही थम लिया है।

—– 

तू जब पास होती है सावन भी त्यौहार हो जाए।

तेरी हँसी से हर मौसम भी गुलजार हो जाए।

बस एक बार तेरा मैं हाथ ही थाम लूँ जानम।

सावन की हर बूँदे प्यार का इजहार कर जाए।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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