श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है आपकी “चौपाई – श्री गणेशाय नमः”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २७७ ☆
🌻 चौपाई – श्री गणेशाय नमः 🌻
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शंकर सुवन भवानी नंदन, वेद मंत्र से पूजन वंदन।
ज्ञान उजागर गुण के देवा, भक्त करें सब मिलकर सेवा।।
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लंबोदर है सुंदर प्यारे, हैं अनंत महिमा है न्यारे।
कृपा दृष्टि से पूरन काजा, हे गणनायक मूषक राजा।।
चरण पखारे निशदिन सेवा, यमुना गंगा निर्मल रेवा।
ज्ञान उजागर गुण के देवा, भक्त करें सब मिलकर सेवा।।
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चार भुजाएं छबि है न्यारी, कटि पीताम्बर तुमको प्यारी।
एक दंत है भगवन धारें, संकट विपदा सबकी टारें।।
बाल मुकुंद मनोहर पुरवा, भोग लगे है लड्डू मेवा।
ज्ञान उजागर गुण के देवा, भक्त करें सब मिलकर सेवा।।
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वक्रतुड की बात निराली, मंद – मंद मुस्काते लाली।
माँ गौरी आँखों के तारें, अरि दानव है तुमसे हारे।।
लौंग पान से सज्जित मेवा, चढ़ता छप्पन भोग कलेवा।
ज्ञान उजागर गुण के देवा, भक्त करें सब मिलकर सेवा।।
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मातु-पिता सर्वोत्तम जानें, बुध्दि देव सब तुमको मानें।
रिद्धि-सिद्धि है संग तिहारे, बाल सखा सब रोज पधारे।।
आन विराजे मेरे ठेवा, मंगल मूरत मंगल देवा।
ज्ञान उजागर गुण के देवा, भक्त करें सब मिलकर सेवा।।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







