श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “जीने में आसानी है क्या?“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १४९ ☆
जीने में आसानी है क्या? ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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मुझ पर ये मनमानी है क्या
अपने पर हैरानी है क्या
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मरना तो आसान बहुत है
जीने में आसानी है क्या
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पूछ रहे मासूम परिंदे
छत पर दाना पानी है क्या
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घर की सब मर्यादा टूटी
रही न दादी नानी है क्या
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सर पर शुहरत बोल रही है
कहना मेरा सानी है क्या
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बन जाता मैं तेरा आशिक़
उससा तू लासानी है क्या
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टकराने जाते पर्वत से
तुमको मुँह की खानी है क्या
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हाथ सफलता कब आ जाये
तुमने किस्मत जानी है क्या
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बच्चे किस्सा सुनते बोलें
इक राजा इक रानी है क्या
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उस नादाँ को क्या समझाएं
पूछ रहा सब फ़ानी है क्या
*
सोच अरुण हालत पे अपनी
बात बड़ों की मानी है क्या
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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