☆ सूचनाएँ/Information ☆
(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)
डॉ गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’
☆ अंतरराष्ट्रीय अवधी सेमिनार, मारीशस – विश्व भाषा अवधी के वैश्विक सर्व मान्यता की ओर बढ़ते कदम ☆ साभार – डॉ.गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ ☆
अवधी के ध्वज और बापू के अहिंसा के संदेश के साथ मारीशस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अवधी सेमिनार हेतु भारतीय विद्वत्मंडल रवाना।
भारत से तीस आचार्यों का एक अकादमिक मंडल लख़नऊ से अवधी भाषा के वैश्विक स्वरूप की मान्यता और उसके सम्यक् प्रचार -प्रसार के लिए सुदूर अफ्रीकी महाद्वीप में स्थित मारीशस की अकादमिक यात्रा के लिए चारबाग स्टेशन से तेजस ट्रेन से रवाना हुआ। देश के कोने कोने से आने वाले इस विद्वत्मंडल के शेष सदस्य दिल्ली स्थित इंदिरा गाँधी अंतर राष्ट्रीय एअरपोर्ट, दिल्ली पर इस दल का हिस्सा बनें और फिर उन्होने मारिशस के लिए उड़ान भरी। अपनी सात समंदर पार वाली लंबी उड़ान के बाद अवधी के ध्वज और बापू के अहिंसा के संदेश के साथ यह भारतीय विद्वत्मंडल लघु भारत के नाम से दुनिया भर में चर्चित अपने गिरमिटिया पूर्वजों की स्वर्णभूमि मारीशस में अपनी उपस्थिती दर्ज कराएंगे।
अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी, लखनऊ, भारत, आर्य महासभा, मॉरीशस एवं हिंदी साहित्य अकादमी, मारीशस के संयुक्त तत्वावधान में ‘महात्मा गांधी के कालजयी दृष्टिकोण की पुनर्कल्पना : 21वीं सदी के परिप्रेक्ष्य में’ विषयक अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश के अलग-अलग हिस्सों से जा रहे मनीषी विचार- विमर्श करेंगें।
इस आयोजन में मॉरीशस से स्थानीय समन्वयक के रूप में हिंदी साहित्य अकादमी के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. हेमराज सुंदर जी, छह सौ से अधिक पात्रों और तीन हज़ार से अधिक पृष्ठों वाले विश्व के विशालतम उपन्यास ‘पथरीला सोना’ के सर्जक श्रीरामदेव धुरंधर और डॉ. जयचंद लाल बिहारी जी योगदान दे रहे हैं।
लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी के संस्थापक निदेशक डॉ. गंगा प्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’ जी ने यात्रियों के दल को एक बड़े लक्ष्य के लिए विदा करते हुए सुखद यात्रा और सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
इस यात्रा में प्रो० शैलेंद्र नाथ मिश्र, अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष, प्रो० जयशंकर तिवारी कार्यकारी निदेशक, प्रो० आर० पी० पाठक, संरक्षक और अंतरराष्ट्रीय अकादमी के सचिव प्रो० अनिल विश्वकर्मा इस महत सारस्वत आयोजन के संयोजक की भी भूमिका निभाएँगे ।
इस यात्रा से जहाँ एक ओर भारत और मॉरीशस के संबंध मधुर एवं सुदृढ़ होंगे वहीं ‘रामचरित मानस’ को वैश्विक महाकाव्य तथा अवधी भाषा को वैश्विक भाषा के रूप में स्वीकृति मिलेगी।
वहाँ की संगोष्ठी में समकालीन वैश्विक परिवेश में विश्व शांति हेतु गांधी दर्शन की प्रासंगिकता भी समझी जा सकेगी।
साहित्यक यात्रियों का यह विद्वत्मंडल मारीशस के राष्ट्रपति और भारतीय उच्चायोग, मारीशस से भी शिष्टाचार भेंट भी करेगा।
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साभार – डॉ. गंगाप्रसाद शर्मा ‘गुणशेखर’
संस्थापक निदेशक, अंतरराष्ट्रीय अवधी अकादमी
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






