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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹– सद्मार्ग मिशन, खड़की, पुणे द्वारा रामोत्सव आयोजित – ☆ साभार – श्री संजय भारद्वाज –🌹

अनन्य होकर भी राम सहज हैं, अतुल्य होकर भी राम सरल हैं, अद्वितीय होकर भी राम हरेक को उपलब्ध हैं। डाकू रत्नाकर ने ‘मरा-मरा’ जपना शुरू किया और राम-राम तक आ पहुँचा। व्यक्ति जब सत्य भाव और करुण स्वर से ‘मरा-मरा’ जपने लगे तो उसके भीतर करुणासागर राम आलोकित होने लगते हैं।

राम का शाब्दिक अर्थ हृदय में रमण करने वाला है। राम का विस्तार शब्दातीत है। यह विस्तार लोक के कण-कण तक पहुँचता है और राम अलौकिक हो उठते हैं। कहा गया है, ‘रमते कणे कणे, इति राम:’.. जो कण-कण में रमते हों, वही श्रीराम हैं।

ये विचार ज्ञानमार्ग के पथिक, तत्वश्री संजय भारद्वाज के हैं। खडकी स्थित श्रीराम मंदिर में सद्मार्ग मिशन ने ‘रामोत्सव’ का आयोजन किया था।  वे उत्सव में श्रीराम के जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रबोधन कर रहे थे।

इस अवसर पर  श्रीराम स्तुति, श्रीरामरक्षास्तोत्रम् एवं हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ हुआ। श्रीमती मधु शर्मा ने भजन प्रस्तुत किए। श्री आशु गुप्ता ने साज-संगत की। श्री सुरेन्द्र बढ़े और अनिरुद्ध स्वामी सत्संग मंडल ने विशेष सहयोग किया।

इस  उत्सव को सफल बनाने के लिए श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र बागनाईक, सदस्य स्नेहल पृथ्वीराज, पं. हरीश पांडेय, कृतिका भारद्वाज ने विशेष परिश्रम किया।

रामोत्सव को व्यापक जनसमर्थन मिला। अनेक क्षेत्रों के गणमान्य उत्सव में उपस्थित थे।

साभार – श्री संजय भारद्वाज 

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय ≈

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