श्री प्रशान्त चतुर्वेदी
(श्री प्रशान्त चतुर्वेदी जी का ई-अभिव्यक्ति में हार्दिक स्वागत. आप सेवा निवृत्त सदस्य, म प्र विद्युत नियामक आयोग, स्वतंत्र लेखक, कवि एवं ब्लॉगर। प्रकाशित काव्य संग्रह- मेरी बातें मेरे किससे याद रखोगे। अभिरुचि – कविता पाठ। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय व्यंग्य “सपना मेरा टूट गया”।)
☆ व्यंग्य ☆ “सपना मेरा टूट गया” ☆ श्री प्रशान्त चतुर्वेदी ☆
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मेरी पत्नी किराए के मकान में रह कर ऊब चुकी हैं। अब वे अपनी सहेलियों की तरह ख़ुद का मकान चाहती हैं। मैंने उन्हें यूरोपियन कहावत का हवाला दिया कि मूर्ख व्यक्ति मकान बनाते हैं और बुद्धिमान उसमें रहते हैं। वे बोलीं, हमारा मुँह मत खुलवाओ कि हम दोनों में मूर्ख कौन है। जब पैदाइशी हो, तो एक मकान भी बना ही लो। और फिर उसमें रहने के लिए मेरे जैसी एक अदद बुद्धिमान महिला भी उपलब्ध है।
हमने हथियार डाल दिए और अखबार में नज़र गड़ा दी। अख़बार में एक विज्ञापन दिखा, न्यू मनिपाल रीजेंसी में फ्लैट और पंक्तिबद्ध मकान विक्रय पर हैं। याद आया कि व्यंग्यकार मित्र शुकुल जी वहीं रहते हैं। वे नौकरी भी करते रहे और व्यंग्य भी लिखते रहे, इसलिए आज ख़ुद के मकान में हैं। हमारी तो खैर जीवन कथा स्वयं में ही एक व्यंग्य रही।
बहरहाल हम तैयार होकर शुकुल जी के घर पहुंच गये और औपचारिकताओं के बाद जानकारी लेने का सिलसिला शुरू किया। पूछा कि भाईसाब जिंदगी किराये के मकान में निकल गई, अब अगर न्यू मनिपाल रीजेंसी में आयेंगे तो कैसा महसूस होगा? उन्होंने तपाक से उत्तर दिया, अरे आप तो आ जाइये। आपको किराये का मकान छोड़ने की कमी ही नहीं महसूस होगी। वहाँ आप किराया देते हैं, यहाँ नगर निगम को सम्पत्ति कर, कचरा डिस्पोजल कर, जल कर, बिल्डर का सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न होने की एवज में कर तो आप देंगे ही। इसके अलावा बिल्डर को भी मेंटेनेंस चार्ज, वाटर चार्ज, नर्मदा जल चार्ज, सीवेज लाइन बदलने का चार्ज और पानी कम आ रहा हो तो पाइप लाइन बदलने का चार्ज देते रहेंगे, आपको ऐसा ही लगेगा कि मकान में किराया देकर रह रहे हों। और फिर बिल्डर के कर्मचारी आपको फील दिलाते रहेंगे, जैसे मकान मालिक वो लोग हैं और आप किरायेदार। किराए का मकान छोड़ने का ग़म तो आप बिल्कुल मत कीजिए।
हमने पूछा कि शुकुल जी, यहाँ रहने का कोई फ़ायदा भी है क्या? शुकुल जी बोले आपने एस ई जेड का नाम सुना है। हमारे चेहरे पर विस्मय बोध देख कर लगा मानो वे पुराने ओरिएंट पंखे के विज्ञापन की तरह कह रहे हों, अरे ये पी एस पी ओ नहीं जानता। खैर शुकुल जी ने ख़ुद ही समझाया एस ई जेड उद्योगों का ऐसा हिस्सा होता है, जो भारत में है, फिर भी नहीं है। उसे कई नियमों से छूट ऐसे मिलती है, जैसे वो सिंगापुर में हो। आप यहाँ रह कर तो देखें, आपको लगेगा कि भारत सरकार के ट्रैफिक नियम यहाँ नहीं लगते। बिल्डर की गाड़ियाँ धड़ल्ले से बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के स्पीड लिमिट की परवाह किए बग़ैर दौड़ती नज़र आयेंगी। बिल्डर के कर्मचारी तीन सवारी बिना हेलमेट के ऐसे फर्राटे से चलते नज़र आएँगे, जैसे उन्हें ट्रैफिक विभाग ही नहीं, यमराज से भी अभयदान मिला हो। आप भी बहती गंगा में हाथ धोइये, कॉलोनी के भीतर बिना हेलमेट दोपहिया चलाइये और बिना सिक्योरिटी नम्बर प्लेट वाले चौपहिया को बिना सीट बेल्ट पहने चलाइये।
हमने अपने भोंदूपन का प्रदर्शन करते हुए पूछा कि किराए के मकान में कोई समस्या आने पर मकान मालिक को बताते थे। यहाँ क्या करना होगा? शुकुल जी ने प्रतिप्रश्न किया आपने अपनी जवानी के दिनों में हिंदी जासूसी फ़िल्म देखीं थीं या नहीं। इस बार हमने जल्दी से हामी भर दी। उन्होंने याद दिलाया कि उन फ़िल्मों में बॉस के अड्डे पर कुछ लाल, पीली, नीली बत्तियाँ जलती बुझती थीं और बैकग्राउंड में कभी कभी बॉस की भारी आवाज़ आती थी। बॉस नज़र नहीं आता था, लेकिन उसके गुर्गे सारे काम बॉस की आवाज पर करते थे। कॉलोनी में बिल्डर का एक ऑफिस है, वहाँ का नज़ारा भी कुछ इससे मिलता जुलता दिखाई देगा। अगर कर्मचारियों को आपका काम करने के लिये बॉस का ऑर्डर मिल गया, तो समझिये काम हो जाएगा।
हमारी समझ में ही नहीं आ रहा था कि शुकुल जी व्यंग्य की तरंग में हैं या फिर वे चाहते ही नहीं कि हम उनके आस-पड़ोस में रहें। हमने उनसे इजाज़त माँगी तो उन्होंने कहा कि थोड़ी और देर रुकते, तो तुम्हारी भाभी आ जातीं। फिर चाय पकौड़े खा कर ही जाते।
हम क्षमा याचना करते हुए वहाँ से निकल पड़े, लेकिन न्यू मनिपाल रीजेंसी कॉलोनी में मकान लेने का विचार तो हमने त्याग ही दिया था।
(नोट- इस व्यंग्य कथा में वर्णित कॉलोनी, किरदार और घटनायें काल्पनिक हैं। यदि किसी से कोई साम्य हो तो यह मात्र संयोग है।)
© श्री प्रशान्त चतुर्वेदी
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





