श्री जगत सिंह बिष्ट

(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)

🌼 ओणम की महक और बचपन की एक दुनिया🌷

कुछ रिश्ते दूरियों से नहीं, यादों की गर्माहट से जीवित रहते हैं… 💛

ओणम का पर्व आते ही मेरे भीतर एक गहरी-सी उदासी में लिपटी, मीठी-सी खुशी जाग उठती है।

नॉस्टैल्जिया तो हम हर त्योहार पर ओढ़ लेते हैं—बचपन याद आया, पुराने दिन याद आए, और बस! लेकिन यह वाली याद कुछ अलग है। यह बहुत गहरी है—भावनाओं, रिश्तों और जाने कितनी परतों में फैली हुई। इसमें एक पूरा घर है, एक परिवार है, एक दोस्ती है और बचपन से लेकर आज तक की एक लम्बी यात्रा है। ❤️

मुझे आज भी वह पुराना-सा घर याद है—प्रवेश द्वार पर लकड़ी की जालियाँ, ऊपर ब्रिटिश ज़माने की छत की खपरैल और नीचे पत्थर का फर्श। सादगी में लिपटा हुआ, मगर अपने भीतर अपार अपनापन समेटे वह घर मेरे बचपन का एक बहुत प्रिय हिस्सा था।

वह मेरे बचपन के मित्र मुकुंदन का घर था।

हमने किंडरगार्टन से लेकर विश्वविद्यालय तक साथ पढ़ाई की। उसके घर में उसकी छोटी बहन, माँ और अच्छन थे—और न जाने कब मैं उस घर का मेहमान भर न रहकर परिवार की आत्मीयता का हिस्सा बन गया था। 🏡❤️

और फिर आता था ओणम।

उस दिन वह घर जैसे अचानक किसी मंदिर में बदल जाता। सजावट, फूल, पूजा की तैयारी और केरल की पारम्परिक वेशभूषा में सजे परिवार के सदस्य—सब कुछ देखते ही बनता था। घर में दिन भर मेहमानों का आना-जाना लगा रहता।

और मैं?

मैं अक्सर एक कुर्सी के कोने में बैठा, चुपचाप इस पूरे उत्सव का home witness बना रहता। 😊

बचपन से किशोरावस्था, फिर युवावस्था और देखते-देखते हमारे जीवन के मध्य वर्षों तक—हर साल ओणम आता रहा और अपने साथ वही आत्मीयता लेकर आता रहा।

फिर आती थी सद्या। 🍃

केले के पत्ते पर सजा वह भोजन अपने आप में रंगों, सुगन्धों और स्वादों का उत्सव होता था। मुझे उसका हर व्यंजन पसन्द था, लेकिन मेरा सबसे प्रिय था पायसम—विशेषकर वह मीठा व्यंजन जिसे मैं आज भी अपने बचपन की सबसे स्वादिष्ट स्मृतियों में गिनता हूँ।

माँ को मालूम था कि मुझे वह कितना पसन्द है।

वह प्यार से मेरे केले के पत्ते पर दूसरी बार डालतीं… फिर तीसरी बार।

और यह सिलसिला किसी एक-दो ओणम का नहीं था। वर्षों तक चलता रहा।

उस अतिरिक्त कटोरी में सिर्फ मिठास नहीं थी—उसमें एक माँ का स्नेह था। ऐसा स्नेह जिसका स्वाद उम्र बढ़ने के साथ कम नहीं होता, बल्कि और गहरा हो जाता है। ❤️

कैसे उड़ जाते हैं अच्छे दिन!

तब हम बच्चे थे। फिर किशोर हुए, जवान हुए और अब देखते-देखते बालों में सफेदी उतर आई है। हम दोनों वरिष्ठ नागरिकों की कतार में आ खड़े हुए हैं। समय ने बहुत कुछ बदल दिया, लेकिन एक चीज़ नहीं बदल पाई—एक-दूसरे के प्रति वह अपनापन।

मुकुंदन अब अपने मूल स्थान, God’s Own Country—केरल, लौट चुका है। इस ओणम पर वह अपने परिवार के साथ वहीं सद्या का आनन्द लेगा।

और मैं?

मैं यहाँ इन्दौर में अपने पुराने साथी के साथ, केरल की ही जड़ों से निकले Indian Coffee House में सद्या का स्वाद लूँगा। 🍃🥥

भौगोलिक दूरी आज बहुत है।

लेकिन मुझे लगता है, इस ओणम पर हम दोनों के दिल उसी दूरी को नकार देंगे।

वहाँ केले के पत्ते पर सजी सद्या होगी… यहाँ उसकी याद।

वहाँ केरल की हवा में ओणम की खुशबू होगी… यहाँ स्मृतियों में वही सुगन्ध।

और शायद किसी क्षण, जब हम दोनों अपने-अपने पत्ते पर रखे किसी मीठे व्यंजन का स्वाद लेंगे, तो हमारे भीतर बचपन का वही पुराना घर फिर से जीवित हो उठेगा—लकड़ी की जालियों वाला, खपरैल की छत वाला, पत्थर के फर्श वाला…

और उस घर के किसी कोने में मैं अब भी बैठा रहूँगा—एक कुर्सी पर चुपचाप—मुकुंदन के घर की रौनक देखता हुआ और माँ के हाथों से तीसरी बार परोसे गए पायसम का आनन्द लेता हुआ। 😊❤️

कुछ रिश्ते समय के साथ पुराने नहीं होते।

वे बस यादों में और खूबसूरत होते जाते हैं।

इस ओणम पर शायद हम दूर हों, मगर हमारे दिल वही पुरानी लय में धड़केंगे—

उसी स्नेह, उसी आत्मीयता और उसी बचपन की सद्या की खुशबू के साथ। 🌼🍃❤️

शुभ ओणम मुकुंदन! 🌸

Happy Onam Everyone! 🌺

कुछ त्योहार कैलेंडर पर आते हैं।

कुछ सीधे दिल में उतर जाते हैं। ❤️

 

© श्री जगत सिंह बिष्ट 🥰

साधक

LifeSkills

A Pathway to Authentic Happiness, Well-Being & A Fulfilling Life! We teach skills to lead a healthy, happy and meaningful life.

The Science of Happiness (Positive Psychology), Meditation, Yoga, Spirituality and Laughter Yoga. We conduct talks, seminars, workshops, retreats and training.

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈

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अ.ल. देशपांडे, अमरावती.
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बहुत सुंदर.
स्मरणरंजन का अनोखा स्वाद .
संस्कृती का संस्मरण.
भावनाओंका कोलाहल.
सहपाठी स्नेही का सुखद स्मरण.
सादगी वाला घर आपने सजाया है
अपनी पैनी लेखन शैली हे.
सुंदर क्षणों को पिरोया है आपने
सशक्त अक्षरों की माला में.