श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक विचारणीय आलेख ‘विनम्रता…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # ९० ☆ आलेख – विनम्रता… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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व्यक्ति का सबसे सर्वश्रेष्ठ गुण है, विनम्रता, हमने देखा है, कि, भारतवर्ष में, श्री राम जी के सेवक हनुमान जी के मंदिर ज्यादा हैं, श्रीराम जी के कम है, शायद, हम सब ने भी नोटिस किया होगा, श्री राम के मंदिर में तो हनुमान जी विराजमान हैं, परंतु हनुमान जी के साथ श्री राम जी की मूर्ति शायद ही कहीं मिले, इसका आकलन जब किया गया तो ज्ञात हुआ, कि, हनुमान जी में सर्वश्रेष्ठ गुण था विनम्रता, कितने भी काम किए, चाहे समुद्र को पार करके सीता जी का पता लगाने का काम हो, लंका दहन का काम हो, लक्ष्मण जी के प्राण बचाने का काम हो, संजीवनी बूटी लाने का काम हो, हनुमान जी ने कभी इसका श्रेय नहीं लिया, जब हनुमान जी अशोक वाटिका में सीता जी के सामने पहुंचे, सीता जी ने पूछा, तुम कौन हो? तो उन्होंने यह नहीं बताया कि, मैं हनुमान हूं जो बचपन में सूर्य को निकल गया था या सागर लांघकर आपका पता लगाने आया हूं, बल्कि उन्होंने यह कहा,
रामदूत मैं मातु जानकी
सत्य शपथ करुणा निधान की
जब भी कोई कार्य सिद्ध हुआ, उन्होंने यही कहा, यह मेरा प्रताप नहीं, श्री राम का प्रताप है, उन्होंने ही मुझसे कार्य करवाया है, और आज श्री हनुमान जी के मंदिर पूरे भारत में स्थित हैं।
तो विनम्रता वह गुण है जो किसी को भी श्रेष्ठ बनाते हैं.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈




