श्री राजेन्द्र तिवारी

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘किसी का यहां कोई नहीं…‘।)

☆ अभिव्यक्ति # १२७ ☆

☆ किसी का यहां कोई नहीं… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆

तूने अजब रचा ये संसार,

किसी का यहां कोई नहीं,

कहने को तो सब हैं यहां,

पर संगी साथी कोई नहीं,

तूने अजब…

 

मिथ्या जगत है, मिथ्या रिश्ते,

मिथ्या सब नाते हैं,

कोई किसी के साथ न चलता,

मिथ्या सब बातें हैं,

कैसी लीला ये तेरी करतार,

किसी का यहां कोई नहीं,

तूने अजब…

 

साँस चल रही, जब तक तेरी,

रिश्ते बने हैं, सुहाने,,

ज्यों ही तेरी, सांस ये छूटे,

कोई न तुझे पहचाने,

कैसे जीवन हुआ लाचार,

किसी का यहां कोई नहीं,

तूने अजब…

 

जैसी तेरी करनी होगी,

वैसी तेरी भरनी होगी,

कर्म की गठरी लेकर तुझको,

राह अकेले चलनी होगी,

बिछे राह में शूल अपार,

किसी का यहां कोई नहीं,

तूने अजब रचा ये संसार,

किसी का यहां कोई नहीं.

 

☆

© श्री राजेन्द्र तिवारी  

संपर्क – 70, रामेश्वरम कॉलोनी, विजय नगर, जबलपुर

मो  9425391435

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/ ≈

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