मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग
कविता – चित्रांकित…
मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग ☆
एक दिन दिल में आया, कि..
ज़िंदगी की तस्वीर बनाऊँ
कूची उठाई
कुछ रंग सहेजे
और..
काग़ज के सीने पर
एक रास्ता बनाया
उसमें कुछ गड्ढ़े
कुछ पत्थर
कुछ कांटे बनाए।
फिर एक दरख़्त बनाया
हरा-भरा..
उसकी छांव बनाई
और बस, यूँ लगा कि
लो हो गई ज़िंदगी की कल्पना
चित्रांकित…!!!!!
© मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग
संपर्क – बिलासपुर (छ ग) मो नं 8319743682
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






