सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – धर्म -पथ…।

? रचना संसार # ६७ – गीत – धर्म -पथ…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

☆

आज लेकर प्रण अटल ,धर्म पथ पर हैं चले।

कर्म की पूजा करें ,अरि रहे पैरों तले।।

*

श्याम की गीता पढ़ो,कर्मयोगी तुम बनो।

शुभ्र सौम्या कर्म हो ,सत्य को ही तुम चुनो।।

दुष्ट को मिलती सजा,  झूठ भी है हारता।

कौरवों की चाल पर,सत्य पांडव जीतता।।

धर्म की सत्ता चले,धर्म से ही जग पले।

*

वासना से मुक्त हो  ,व्यूह रचना तोड़ दो,।

दम्भ से मुख मोडिए ,द्वेष को भी छोड़ दो।।

लोभ माया क्रोध तज,मत हृदय कर तू विकल।

छोड़ दे  छल छंद सब ,हो मनुज जीवन सफल।।

भेदभावों को तजो ,शाम दुख की तब ढ़ले।

*

प्रेम सबसे कीजिए,बोल मधुरिम बोलिए।

साथ देकर दीन का ,बंद पट को खोलिए।।

प्रेम की सरिता बहा ,पुष्प प्रेमिल दे खिला।

शांति  पथ पर चल सतत ,मृदु सुधा रस को पिला।।

छोड़ कलुषित भावना ,हाथ कपटी भी मले।

☆

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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