श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # १७८ ☆
☆ गीत ।। कदापि करी गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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कदापि करी गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है।
सबके लिए सरोकार ही जीवन में अर्थ लाती है।।
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आपके मन वचन कर्म से किसी का अहित न हो।
वह जीवन ही नहीं कि आपके हाथ से हित न हो।।
व्यक्ति की करी गई मेहनत जरूर सामर्थ्य लाती है।
कदापि करी गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है।।
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पतझड़ के बाद भी जरूर फिर से बसंत आता है।
आपका सौहार्द सहयोग ही दुखों का अंत लाता है।।
मानवता के विरुद्ध हर एक बात अनर्थ लाती है।
कदापि करी गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है।।
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मत आप हमेशा उलझे रहो हर एक छोटी लड़ाई में।
आपका सरोकर रहे हमेशा ही सबकी भलाई में।।
यह गुण स्वार्थ नहीं भावना निस्वार्थ ही लाती है।
कदापि करी गई भलाई व्यर्थ नहीं जाती है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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