डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “शुभ-चिंतक…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # ५
कविता – शुभ-चिंतक ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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कुछ ऐसे भी शुभचिंतक, जो मेरे शुभ पर चिंतित हैं
सचमुच शुभ की फ़िक्र करें, ऐसे मुट्ठी भर किंचित हैं
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सियासत के रंगमंच पर हर दिन नये प्रपंच हुए
पहना मुखौटा हर चेहरा, नाटक हर दिन मंचित है
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तथ्यों की चादर जब-जब भी,सच के ऊपर डाली है
तब-तब झूठ के बस्ते में, इतिहास हमारे संचित हैं
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मूल्यों की नींवों में अब स्वार्थों का पानी भरता है
और नीति-अनीति की खानों में,आँकड़े पूर्व सुनिश्चित हैं
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जनमत का मोल चुकाया था, हमने कल भी आशा में
अब फिर बिकते हैं सपनों में, वादे जो सुंदर चित्रित हैं
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‘राजेश‘ अब तक जो पीठ पर, छुरा भोंकते आये हैं
हम अपनों की ऐसी मेहरबानी से अभिसिंचित हैंll
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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