श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “शब्दों में वो मर्म है…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २३८ ☆
☆ # “शब्दों में वो मर्म है…” # ☆
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अब कहां हमारे शब्दों में
वह मर्म है
खोखली रचनाएं
खोखला लेख किए कर्म है
होड़ है बाजार में
कैसी मूर्तियां गढ़ें
बुत बनाकर हाकिम की
नजर में चढ़े
सुबह शाम रहें
उनके चरणों में पड़े
बेवजह क्यों
इस व्यवस्था से लड़े
भाट बनकर यशोगान करना ही
अब धर्म है
बिकने वाली कलम के
कई खरीददार है
अब लेखन निष्पक्ष नहीं
व्यापार है
धारा के विरुद्ध लिखने वाला
गुनहगार है
कसीदे पढ़ने वालों को
मिलता”पुरस्कार” है
सिक्कों की खनक में डूबने वालों को
कहां शर्म है
शब्दों के धनी
यहां कई रचनाकार है
गरीबों का दुख वंचितों की पीड़ा
ही उनका आधार है
सामंती व्यवस्था के विरुद्ध
लिखते बार-बार है
उन पर होते हैं जानलेवा हमले
यह व्यवस्था की हार है
डर जाए जो इन हादसों से
वह अधर्म है
किसी न किसी को तो
लड़ना ही पड़ेगा
सुलझाने समस्या
आगे बढ़ना ही पड़ेगा
यह जुर्म है तो
हमें करना ही पड़ेगा
शब्दों की चोट कर
इतिहास गढ़ना ही पड़ेगा
आगे बढ़ो दोस्तों
अभी लोहा गर्म है /
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© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
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