डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय रचना “कई हैं…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # १०
कविता – कई हैं… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
रह घूँघट में, जेठ कई हैं,
ठाठ हैं किंचित, ठेठ कई हैं
*
अव्यवस्था की चपेट में
चिपकर मटियामेट कई हैं
*
बच भागे, बेदाग़ वे देखो
मालूम जिनको गेट कई हैं
*
राशन मुफ़्त, योजना अनगिन
तब भी भूखे पेट कई हैं
*
खाट खड़ी, चकराया सर भी
चीज़ एक ही, रेट कई हैं
*
राजनीति के मकड़जाल में
फँसकर भी, अपडेट कई हैं
*
ऑफिस फाइल बाबू अफ़सर
कानूनी अलसेट कई हैं
*
कांक्रीट सिटी में बिजनेस
ग्राहक ज्यों आखेट कई हैं
*
ईमान बिक जाता सस्ता
ऐसे भी मार्केट कई हैं
*
सत्ता हुक़ूमत पॉवर उनकी
जिनके चमचे-प्लेट कई हैं
*
शोर, चुनावी – वादों हेतु
बैनर फ्लैक्स पैम्फलेट कई हैं
*
दुर्घटना में वो ही फटते
सर जो बिन हेलमेट कई हैं
*
फास्ट हुए न, रह गए पिछड़े
ऐसे लेज़ी – लेट कई हैं
*
न्यू जनरेशन उलझे जिसमें
ऐसे इण्टरनेट कई हैं
*
परहेज प्याज – लहसुन से
और खाते आमलेट कई हैं
*
पेट्रोल – डीजल के दाम पर
बिक जाते, घासलेट कई हैं
*
समझें वे ख़ुद को अमरीका
जिनके बम – रॉकेट कई हैं
*
श्री -श्री के कुर्ता – पाजामा
शूट – बूट जाकेट कई हैं
*
ढूंँढ़ न पाओगे, काला धन
गोपनीय पॉकेट कई हैं
*
गई मरोड़ी, वही गर्दनें
गले जिनके लॉकेट कई हैं
*
लाइफ भी तो इक क्रिकेट है
अब तक गिरे विकेट कई हैं
*
मिली जगह ना, केबिनेट में
बेचारे अपसेट कई हैं
*
टिकट जुगाडू वे ही पाते
जिनके लाग-लपेट कई हैं
*
बॉस की टेबल, के क्या कहने
बिल कम, पेपर – वेट कई हैं
*
मीडिया सोशल, रील-वीडियो
डेटाखोर, झकलेट कई हैं
*
ब्लैक आँकड़े, व्हाइट साइन
बिल हो रये, जनरेट कई हैं
*
बैलेट उनके ही फेवर में
जिनके पास, बुलेट कई हैं
*
“चुनावी आपदा” कम्बल-बॉटल
बँट जाते, पैकेट कई हैं
*
सी.बी.आई. भी, है अचरज़ में
दफ़्तर के सीक्रेट कई हैं
*
सियासती बैटिंग – फील्डिंग में
बॉलर कई, रन – रेट कई हैं
*
राजनीति के गलियारे में
बिछते कालीन – मेट कई हैं
*
हीरा पक्ष, विपक्षी सोना
इन सबके, कैरेट कई हैं
*
हंगामा बरपा है, चूँकि
स्कैण्डल – रैकेट कई हैं
*
चेतावनी लिखी है, फ़िर भी
पीते, बीड़ी-सिगरेट कई हैं
*
निजीकरण की स्पर्धा में
उलझे, कारपोरेट कई हैं
*
स्वच्छता अभियान है ज़ारी
ग़ुम – शुदा, टॉयलेट कई हैं
*
पॉवरफुल विज्ञापन जहँ-तहँ
बाज़ारू टैबलेट कई हैं
*
प्लेन खटारा, क्रैश हो रहे
मरने को पॉयलेट कई हैं
*
स्कूल सरकारी लेकिन
खर्चे भी प्रायवेट कई हैं
*
सी.डी., डी.वी.डी. के युग में
फँसी हुई कैसेट कई हैं
*
वाई-फाई ई-डिजिटल मैट्रो
लिंक – लैस गैजेट कई हैं
*
ई.डी. छापा, बाल न बाँका
सैफ्टी – सेफ – सैप्रेट कई हैं
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पॉलिटिकल स्कोर बोर्ड में
ज़ीरो सिम्पल, ग्रेट कई हैं
*
ज़हाँपनाह! जहँ पनाह मांगे
अ – हिन्दी स्टेट कई हैं
*
गुरु अगर साइलेण्ट मोड पर
चेले भी वाइब्रेट कई हैं
*
सोर्स फुल एप्रोच करप्शन
एक्टिव ब्यूरोक्रेट कई हैं
*
वर्ल्ड वार का असली रीजन
बम ग्रेनेड औ जेट कई हैं
*
नये क़रतब क्यों न क्रिएट हों
अब भी एसोसिएट कई हैं
*
हैं डकैत और लठैत ऐसे
जिनके पास फिएट कई हैं
*
दिन अच्छे ‘राजेश‘ आ गए
नौकर विरले, सेठ कई हैं ll
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






