श्री एस के कपूर “श्री हंस”

☆ “श्री हंस” साहित्य # १८३ ☆

☆ मुक्तक ।। कांटों से डरो नहीं तो जीवन में गुलाब मिलता है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆

☆

=1=

जिंदगी पल – पल यों ही ढलती जा रही है।

ऐसे ही कल – कल में चलती जा रही है।।

न कोई उत्साह उमंग जीने की आदमी को।

जैसे रेत बस मुठ्ठी से फिसलती जा रही है।।

=2=

बीज बनो ऐसे मिट्टी में दबकर फिर उग आओ।

फल से लद कर पेड़ की  तरह झुक जाओ।।

कोशिश हो हर क्षण  बिखर  कर संवरने की।

मीठा ही बोल सको जीवन में ऐसा रुख लाओ।।

=3=

कांटों से डरो नहीं तो जीवन में गुलाब मिलता है।

होली रंगों में भीग कर ही रंग गुलाल मिलता है।।

मन नियंत्रित हो आपकाऔर न कोई षडयंत्र हो।

तप कर ही हमें फिर सोने सा जलाल मिलता है।।

=4=

किरदार बनाओ खुशबू खुद सफर तय करती है।

प्रेम समा जाए खुद ही नफरत की शय मरती है।।

बस चार दिनों को ही मिलें हैं ये श्वास और प्राण।

जिंदादिली  ही तो जिंदगी से भय को हरती है।।

☆

© एस के कपूर “श्री हंस”

बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब  – 9897071046, 8218685464

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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