स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व  प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  द्वारा रचित – “कविता  – राष्ट्रहित में सोचिये, कर्त्तव्य पथ पर आइये। हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी  काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।) 

☆ काव्य धारा # २५९

☆ राष्ट्रहित में सोचिये, कर्त्तव्य पथ पर आइये…  स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

झूठ-लालच स्वार्थ तज, सच नीति-नय अपनाइये

राष्ट्रहित में सोचिये, कर्तव्य पथ पर आइये।

 * 

कर रही है स्वार्थवश हो राजनीति अपार क्षति

कैसे इस दुर्भावना से भला संभव कोई प्रगति ?

 *

बढ़ती जाती आये दिन, नई-नई समस्यायें कई

हरेक निर्णय से उभरती हैं जटिलतायें नई।

 *

क्यों हुआ है मन यों मैला, क्यों नजर दुर्बुद्धि की ?

जरूरत है आत्मचिन्तन की औं जीवन शुद्धि की।

 *

नामसझ लोगों से दिखते अधिकतर व्यवहार हैं।

जनता की मुश्किलें बढ़ गईं, बढ़ें भ्रष्टाचार हैं।

 *

कठिन होती जा रही है जिन्दगी तकरार से

समस्या तो हल हुआ करती है मिलकर प्यार से।

 *

सभी का दायित्व है कि हों सुरक्षित सही हल

देश की उन्नति हो जिससे और सुखदायी हो कल ।

 *

तेजगति से हमारे भारत का उचित विकास हो

भावनायें हों न कुण्ठित, सबकी पूरी आश हो।

© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी  भोपाल ४६२०२३

मो. 9425484452

vivek1959@yahoo.co.in

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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