स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है – सुमित्र के दोहे…।)

✍ साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २७५ – सुमित्र के दोहे ✍

☆ 

रोई ब्रज की गोपिका, रो रहे नंदलाल।

 चुप्पी साधे राधिका, आंसू करे सवाल।

 *

आंसू का इतिहास है आशु का भूगोल ।

आंसू का विज्ञान अब, रहस्य रहा है खोल।।

 *

आंसू है संवेदना आंसू, मन की पीर।

यशोधरा का रूप है, जसोदा की जंजीर।।

 *

जनक दुलारी चल पड़ी, ओढ़ अश्रु का चीर ।

आंसू डूबी अयोध्या, राम मौन गंभीर ।।

 *

घनानंद का अश्रुधन, अर्पित कृष्ण सुजान।

उसी अश्रु की धार में, डूबे थे रसखान ।।

 *

आंसू डूबी सांस से, रचित ईश्वरी फाग।

रजउ ब्रह्म थी, जीव थी, ऐसा था अनुराग।।

☆

© डॉ. राजकुमार “सुमित्र” 

साभार : डॉ भावना शुक्ल 

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Dr Bhavna Shukla
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सादर नमन