सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’

(सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’ जी का ई-अभिव्यक्ति में  स्वागत। लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता दिव्य गीत यह है गाना।)

☆ कविता ☆ दिव्य गीत यह है गाना ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆

वंदे मातरम गान प्यारा, हर लब तक है पहुंँचाना।

हेलो हाय छोड़ सबको नित, दिव्य गीत ये है गाना।।

*

भरा हुआ है आंचल माँ का, भिन्न-भिन्न उपहारों से।

कोई उऋण नहीं हो सकता, माँ के इन उपकारों से।।

वृक्ष घनेरे मलयागिरि के, पवन सुवासित कर देते।

 फल फूलों से लदे बाग ये, बरबस मन को हर लेते।।

 मातृभूमि के श्री चरणों में, है अपना शीश झुकाना।

 हेलो हाय छोड़ सबको नित, दिव्य गीत यह है गाना।।

*

 परे कल्पना के हरदम ही, रूप तुम्हारा माँ लगता।

 धवल चांदनी रातों में जब, हर कोना दमका करता।।

 शीश हिमालय ताज सजा है, दिनकर बिंदी बन चमके।

 कर में खप्पर धारण करती, अरि भागा करते डर के ।।

जन्म मिले यदि पुनः पुनः तो, हिंदुस्तान सदा पाना।

 हेलो हाय छोड़ सबको नित, दिव्य गीत यह है गाना।।

© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”

झालरापाटन राजस्थान

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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